अपने ही घरों में सुराक्षित नहीं है बहन…बेटियां हुआ खुलासा

हिमाचल प्रदेश की बहू-बेटियां अपने घरों में ही सुरक्षित नहीं हैं। रेप के मामलों में अधिकतर युवतियां अपनों का शिकार होती हैं। उनके साथ दरिंदगी करने के लिए आरोपी अपने और पीड़ित के घर को सबसे सुरक्षित स्थान मानते हैं।

यह खुलासा 2012 में लागू हुए पोक्सो एक्ट के तहत कांगड़ा, ऊना और चंबा में दर्ज हुए 181 मामलों पर फोरेंसिक लैब धर्मशाला के अध्ययन में हुआ है। इसमें सुरेंद्र कुमार पाल, अजय राणा, अरुण शर्मा और अजय सहगल ने विशेष भूमिका निभाई है।

फोरेंसिक लैब के शोध को 2018 में फोरेंसिक और जेनेटिक विज्ञान की अंतरराष्ट्रीय पत्रिका में स्थान मिला था। 181 मामलों पर हुए अध्ययन में खुलासा हुआ कि 23 मामलों में पीड़ित के दोस्तों ने उसे हवस का शिकार बनाया।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार सबसे ज्यादा 48 मामलों में पड़ोसियों ने नाबालिग की आबरू लूटी गई। 19 मामलों में अजनबी, 25 में रिश्तेदार, 30 मामलों में पक्के दोस्त, चार में छात्र और चार में अध्यापकों ने नाबालिगों के साथ रेप किया।

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