रेलवे ट्रैक पर एक महिला का शव पड़ा मिला…..

रेलवे ट्रैक पर पड़े एक महिला के शव को लेकर दो थानों के पुलिसकर्मी आपस में उलझने लगे, दोनों घटना स्थल को एक-दूसरे का क्षेत्र बताने लगे, पर किसी ने भी महिला के शव को रेलवे ट्रैक से उठाकर अलग तक नहीं किया. 21 घंटे तक शव उसी पटरी पर पड़ा रहा और संविधान के रक्षक थाने में बैठकर कुर्सियां तोड़ रहे थे.

21 घंटे तक जितनी भी गाड़ियां उस पटरी से निकली, महिला का शव उतने ही टुकड़ों में बंटता गया, आखिर में 21 घंटों के बाद जब दोनों थानों के अधिकारीयों को ये पता चला कि आखिर वो जगह है किसके क्षेत्र में, तो वे वापिस उसी जगह पहुंचे. लेकिन बुरी तरह क्षत-विक्षत हो चुके शव कि शिनाख्त कैसे की जाती.

पुलिस को शिनाख्त के नाम पर सिर्फ एक लाल साड़ी के चंद टुकड़े हाथ लगे जो खून से सने हुए थे.  उसके बाद पुलिस ने शव के टुकड़ों को इकठ्ठा कर उसे पोस्टमार्टम के लिए शीतगृह में रखवा दिया है, इस संबंध में चौकीदार के बयान पर मधुपुर नगर थाने में यूडी केस दर्ज किया गया है. मामले की जांच चल रही है. लेकिन इस घटना ने मन में एक सवाल जरूर पैदा कर दिया है कि अगर लाशों और खून खराबे के बीच रहने से क्या मानव की संवेदना बिल्कुल मर जाती है ?

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