रामेश्‍वरम में आज भी मौजूद है त्रेता युग के 24 कुंड….

अगर आप घूमने फ़िरने के शौक़ीन है तो रामेश्‍वरम से अच्छा ऑप्शन और कुछ नहीं है। अगर आप अपनी फैमिली के साथ कहीं छुट्टियों पर जाना चाहते है तो रामेश्‍वरम जरूर जाए। अब आप सोचेंगे की इतने कॉन्फिडेंस के साथ रामेश्‍वरम का नाम क्यों ले रहे है ? तो चलिए

रामेश्‍वरम क्यों जाना चाहिए और क्या है ख़ासियत

रामेश्‍वरम, तमिलनाडू राज्‍य में स्थित एक शांत शहर है और यह करामाती पबंन द्वीप का हिस्‍सा है। यह शहर पंबन चैनल के माध्‍यम से देश के अन्‍य हिस्‍सों से जुड़ा हुआ है। रामेश्‍वरम, श्री लंका के मन्‍नार द्वीप से 1403 किमी. की दूरी पर स्थित है। रामेश्‍वरम को हिंदूओं के सबसे पवित्र स्‍थानों में से एक माना जाता है, इसे चार धाम की यात्राओं में से एक स्‍थल माना जाता है। किंवदंतियों के अनुसार, भगवान राम, भगवान विष्‍णु के सातवें अवतार थे जिन्‍होने यहां अपनी पत्‍नी सीता को रावण के चंगुल से बचाने के लिए यहां से श्री लंका तक के लिए एक पुल का निर्माण किया था। वास्‍तव में, रामेश्‍वर का अर्थ होता है भगवान राम और इस स्‍थान का नाम, भगवान राम के नाम पर ही रखा गया। यहां स्थित प्रसिद्ध रामनाथस्‍वामी मंदिर, भगवान राम को समर्पित है। इस मंदिर में हर साल लाखों श्रद्धालु यात्रा करने आते है और ईश्‍वर का आर्शीवाद लेते है।

रामेश्‍वरम से जुड़े कुछ ऐतिहासिक मान्यताएं

ऐसा भी माना जाता है कि रामेश्‍वरम वह स्‍थान है जहां भगवान राम ने अपने सभी पापों का प्रायश्चित करने का निर्णय लिया। रामेश्‍वरम का भारत के इतिहास में एक महत्‍वपूर्ण स्‍थान है जो अन्‍य देशों के साथ व्‍यापार से भी जुड़ा हुआ है। जो लोग श्रीलंका से सीलोन की यात्रा पर जाते है उनके लिए रामेश्‍वरम एक स्‍टॉप गैप प्‍वाइंट है। वास्‍तव में, जाफना साम्राज्‍य का इस शहर पर नियंत्रण रहा है और जाफना के शाही घराने को रामेश्‍वरम का संरक्षक माना गया है।

रामेश्‍वरम में भारी संख्‍या में मंदिर स्थित है जो भगवान राम और भगवान शिव को समर्पित है। यहां बड़ी संख्‍या में तीर्थयात्री आते है। हर साल देश – दुनिया के कोने – कोने से हिंदू धर्म के लोग यहां मोक्ष पाने के लिए पूजा – अर्चना करते है। उनके लिए जीवन में एक बार यहां आना जरूरी होता है। रामेश्‍वरम में 64 तीर्थ या पवित्र जल के स्‍त्रोत है इनमें से 24 को अत्‍यंत महत्‍वपूर्ण माना जाता है। माना जाता है कि इनमें डुबकी लगाकर नहाने से सारे पाप धुल जाते है|

24 कुंडो के पीछे ऐतिहासिक कहानियां हैं 

श्री रामेश्वरम में 24 कुंड है , जिन्हें ‘तीर्थ’ कहकर संबोधित किया जाता है। ऐसी मान्यता है कि इन कुंडो के जल से स्नान करने पर व्यक्ति को उसके सभी पापों से मुक्ति मिलती है। यहां का जल मीठा होने से श्रद्धालु इसे पीते भी हैं। मंदिर-परिसर के भीतर के कुंडों के सम्बन्ध में ऐसी मान्यता है कि ये कुंड भगवान श्रीराम ने अपने अमोघ बाणों के द्वारा तैयार किये थे। उन्होंने अनेक तीर्थो का जल मंगाकर उन कुंडो में छोड़ा था, जिसके कारण उन कुंड को आज भी तीर्थ कहा जाता है।

रामेश्‍वरम जाने का सबसे सरल और आसान तरीक़ा

रामेश्‍वरम के लिए बहुत अच्‍छा नेटवर्क है। देश के कई हिस्‍सों के लिए यहां से रेल सुविधा उपलब्‍ध है। यहां का सबसे नजदीकी एयरपोर्ट, मदुरई में स्थित है।रामेश्वरम से 154 किलोमीटर की दूरी पर मदुरई हवाई अड्डा है। आप यदि रेल के जरिए जाना चाहते हैं तो रामेश्वरम रेलवे स्टेशन देश के विभिन्न शहरों से पूरी तरह से जुड़ा हुआ है। यहां के लिए मुंबई से सीधी रेलगाड़ियां चलती है। अगर आप रामेश्वरम घूमना चाहते हैं तो यहां आपको यातायात की हर सुविधा उपलब्ध मिलेगी।

 

रामेश्‍वरम की यात्रा का सबसे अच्‍छा समय 
रामेश्‍वरम में गर्मियों का मौसम काफी गर्म और सर्दियां सुखद होती है। सर्दियों के दौरान रामेश्‍वरम की सैर के लिए आएं। लेकिन ऐसा कोई जरुरी नहीं है आप अप्रैल के महीने में भी रामेश्‍वरम आ सकते है।

 

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