एक बार गए तो आने का मन न करेगा इन जगहों से ……

कई जगहों पर आप घूमने गए भी होगें। जब भी कहीं घूमने जाने का प्लान बनता है तो वहीं 10-15 जगहों पे आकर आपकी रिसर्च रुक जाती होगी l आज हमको बताते है भारत की एेसी जगहों के बारे में जिनके बारे में अधिकांश लोगों को नहीं पता।

– जड़ों से बना पुल, चेरापूंजी, मेघालय

इस पुल को बनाने के लिए पेड़ को इस तरह से उगाया जाता हैं कि उसकी जड़ें आपस में मिलकर पुल बना लें l यहां मौजूद कुछ पुल 500 साल से भी पुराने हैं और अब भी इंसान के प्रयोग के लिए एक दम सही हैं।

– Dog temple, चन्नपटना, कर्णाटक
कुत्तों को सबसे वफादार जानवर भी कहा जाता है, चन्नपटना के रामनगर जिले में कुत्तों की पूजा की जाती है। इन्हें भगवान का रूप मानकर पूजा जाता है।

– हैंगिंग पिलर, लेपाक्षी, आंध्र प्रदेश

लेपाक्षी के एक मंदिर में 70 खम्बे मौजूब हैं। इनमें एक एेसा खम्बा भी है जो जमीन से  नहीं जुड़ा हुआ। इस खम्बे के नीचे से यहां आने वाले लोग कुछ न कुछ निकाल कर देखते हैं l उनका मानना है ऐसा करने के बाद उनके जीवन में कुछ अच्छा होता है।

– शेत्पाल, महाराष्ट्र

महाराष्ट्र के इस गावं में सांप की पूजा होती है। खुलेआम यहां सांप घरों में घुमते हैं और बच्चे भी सांप के साथ ही दिन रात गुजारते हैं। अभी तक ऐसी कोई खबर नहीं आई है जब किसी सांप ने गावं वाले को डसा हो।

– बुलेट बाबा, बंदई, राजस्थान

जोधपुर के गांव बंदई में एक व्यक्ति ने शराब के नशे में उन्होंने अपनी बुलेट बाइक पेड़ से टकरा दी, जिससे उसकी मौत हो गई थी। पुलिस उस बाइक को पुलिस स्टेशन ले आई। अगली सुबह वो मोटरसाइकिल फिर उसी जगह मिली जहां एक्सीडेंट हुआ था। पुलिस एक बार फिर उस बाइक को पुलिस स्टेशन ले आई और उसका सारा पेट्रोल निकालकर उसे चैन से बांध दिया लेकिन एक बार फिर वो बाइक अपने आप उस जगह वापिस पहुंच गई। तब से ऐसा माना जाता है कि ओम बन्ना का भूत ये काम कर रहा है। उसके बाद से यहां से गुजरने वाले लोग यहां शराब और फूल चढ़ाते हैं।

– वीजा बालाजी, चिलकुर, हैदराबाद

ये मंदिर विदेश जाने वाले भारतियों के लिए बना है l कहते है कि लोग यहां वीजा के लिए होने वाले इंटरव्यू के लिए जाने से पहले आते हैं और वीजा मिलने पर लोग इस मंदिर के 108 चक्कर लगाते हैं।

– लाल बरसात, इडुक्की, केरल

केरला में होने वाली लाल बरसात का कारण आज तक कोई पता नहीं लगा सका है l  कुछ लोगों का मानना हैं कि जब भगवान सजा देता है तो लाल बारिश होती है।

– रूपकुंड लेक, चमोली, उत्तराखंड
उत्तराखंड में इस घाटी में पड़ने वाली ठंड की वजह से कोई नहीं रहता लेकिन फिर भी हर साल गर्मियों में यहां 600 से ज्यादा कंकाल निकलते हैं। इस झील को स्केलेटन लेक या मिस्ट्री लेक भी कहते हैं।

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