भारत में बन रही दुनिया की सबसे तेज ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल….

भारत और रूस के वैज्ञानिकों ने एक ऐसा मिसाइल का आविष्कार किया है, जिसे रोकना फिलहाल दुनिया के किसी भी देश के बस में नहीं है। यहां हम बात कर रहे ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल की।

फिलहाल DRDO के वैज्ञानिक ब्रह्मोस मिसाइल के अगला अवतार पर काम कर रहे हैं। इस मिसाइल के तैयार होते ही भारत की परमाणु शक्ति कई गुना बढ़ जाएगी।

हाल ही में भारत ने सुखोई और ब्रह्मोस की घातक जोड़ी का सफल टेस्ट किया। इस टेस्ट के बाद से पड़ोसी देशों में हड़कंप मचा हुआ है। सुखोई और ब्रह्मोस की खतरनाक जोड़ी के बारे में हम आपको पहले भी खबर दे चुके हैं। अब बात करते हैं ब्रह्मोस मिसाइल के अगले प्रोजेक्ट यानि कि ‘ब्रह्मोस-2’ के बारे में पिछले महीने ही ब्रह्मोस प्रोजेक्ट के संस्थापक CEO और MD रहे डॉ. एएस पिल्लई ने बताया था कि ये मिसाइल भगवान कृष्ण के सुदर्शन चक्र की तरह काम करेगी। एक बार दागने के बाद ये मिसाइल अपने लक्ष्य को तबाह करके वापस लौट आएगी।

DRDO के मिसाइल वैज्ञानिक ब्रह्मोस के नए अवतार पर तेजी से काम कर रहे हैं। फिलहाल, दुनिया की सबसे तेज मिसाइल Zirkon सिर्फ रूस के पास है। एक बार लांच होने के बाद इस मिसाइल को रोकना नामुमकिन है। वहीं क्रूज मिसाइल के मामले में ये रिकॉर्ड ब्रह्मोस के नाम है। भारत और रूस के वैज्ञानिकों द्वारा मिलकर तैयार की गई ब्रह्मोस मिसाइल को सुपरसोनिक से हाइपरसोनिक बनाया जा रहा है, यानि ये मिसाइल आवाज की गति से भी तेज से दुश्मन पर हमला बोलने में सक्षम है।

क्या है ब्रह्मोस-2 प्रोजेक्ट : DRDO के वैज्ञानिक इस वक्त ब्रह्मोस मार्क-2 या सीधी भाषा में कहें तो ब्रह्मोस-2 का विकास कर रहे हैं। इस मिसाइल की रफ्तार मॉक 7 यानि 8575 किमी प्रति घंटा तक होगी। इस मिसाइल प्रोजेक्ट पर भारत के पूर्व राष्ट्रपति डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम के नोट्स भी काम में लिए जा रहे हैं। इसी को ध्यान में रखकर ब्रह्मोस एयरोस्पेस ने इस मिसाइल में कलाम का नाम भी जोड़ा है। यानि इस मिसाइल का पूरा नाम होगा Brahmos Mark-II (K)। सबसे खास बात ये है कि इस मिसाइल को शिप, सबमरीन, फाइटर जेट और जमीन में मोबाइल लांचर के जरिए छोड़ा जा सकता है, यानि ये मिसाइल तीनों सेनाओं के लिए तैयार होगी।

अचूक है निशाना : यहां आपको ये भी बता दें कि ब्रह्मोस मिसाइल इकलौती ऐसी मिसाइल है जो दागो और भूल जाओ की नीति पर काम करती है, यानि दागने के बाद इसे मॉनिटर करने की जरूरत नहीं पड़ती। ये अपने लक्ष्य पर सटीक वार करती है और इस मिसाइल को फिलहाल दुनिया का कोई भी रडार सिस्टम नहीं पकड़ सकता, क्योंकि एक तो इस मिसाइल की रफ्तार काफी तेज है और दूसरा की ये मिसाइल बहुत नीचे उड़ान भरती है, जिससे इसे पकड़ना नामुमकिन है। इस मिसाइल को तबाह करने के लिए अभी तक कोई एंटी मिसाइल सिस्टम भी डेवलप नहीं हो पाया है, क्योंकि उन मिसाइलों की रफ्तार ब्रह्मोस के मुकाबले काफी कम है।

ब्रह्मोस 1: ब्रह्मोस मिसाइल का शुरुआती वर्जन पहले ही भारतीय सेना में शामिल किया जा चुका है। ये मिसाइल जरूरत पड़ने पर 300 किलो वजन तक के Nuclear Head को दुश्मन के ठिकाने पर गिरा सकती है। 2007 में ब्रह्मोस को सैन्य बेड़े में शामिल किया गया था और आर्मी के पास फिलहाल इसकी तीन रेजिमेंट हैं। वहीं भारतीय नौसेना के 25 शिप पर ब्रह्मोस की तैनाती कर हो चुकी है। अप्रैल 2017 में पहली बार नेवी ने ब्रह्मोस को वॉरशिप से जमीन पर दागा था, ये टेस्ट कामयाब रहा, नेवी को इसका वॉरशिप वर्जन मिल चुकी है और अब जल्द ही ये मिसाइल भारतीय सीमाओं की आसमान से भी सुरक्षा करेगी।

 

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