सख्त हुए DL के कानून नहीं मिलेगा आसानी से…

रोडरेज की बढ़ती घटनाओं पर केंद्र सरकार ने सख्त रुख अपनाया है। नए नियम के तहत तनाव प्रबंधन और डिफेंसिव ड्राइविंग के गुर सीखे बगैर अब ड्राइविंग लाइसेंस जारी नहीं हो सकेगा। इसे डीएल बनवाने के लिए मनोवैज्ञानिक परीक्षा में शामिल कर दिया है। ड्राइविंग ट्रेनिंग रिसर्च इंस्टीट्यूट में सिम्युलेटर पर ड्राइविंग कौशल जांचा जाएगा। समें आवेदनकर्ता सभ्य आचरण व त्वरित प्रतिक्रिया नया पैमाना होगा। नई व्यवस्था में सैद्धांतिक व व्यावहारिक  प्रशिक्षण के बाद परीक्षा में 85% नंबर हासिल होने पर नया ड्राइविंग लाइसेंस बनेगा या नवीनीकरण हो सकेगा।

सड़क परिवहन व राजमार्ग मंत्रालय ने तीन जुलाई को इंस्टीट्यूट्स ऑफ ड्राइविंग ट्रेनिंग एंड रिसर्च एवं रीजनल ड्राइविंग ट्रेनिंग सेंटर बनाने संबंधित दिशा निर्देश जारी कर दिए हैं। मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि देश में बढ़ते सड़क हादसों व रोडरेज की घटनाएं गंभीर समस्या बन चुकी है। इसलिए स्ट्रेयरिंग संभालने से पहले आवेदनकर्ता को सिम्युलेटर पर इसका अभ्यास करना होगा।

इसमें आपात स्थिति में ड्राइवर की प्रतिक्रिया, व्यवहार, जवाबदेही आदि का अध्ययन किया जाएगा। इसके अलावा व्यावहारिक प्रशिक्षण में ट्र्रेंनग सेंटर में मॉर्डन ट्रैक पर वाहन चलाना होगा।

दिल्ली में प्रशिक्षण शुरू, जल्द पूरे देश में लागू-
अधिकारी ने बताया कि दिल्ली के बुराड़ी, सरायकाले खां, रोहतक आदि में ट्र्रेंनग सेंटर पायलेट प्रोजेक्ट के तहत शुरू किए गए हैं। जल्द ही ऐसे केंद्र देश के हर बड़े शहरों में खोले जाएंगे। ताकि सभी लोगों को प्रशिक्षण मिल सके। अधिकारी के मुताबिक, रिसर्च इंस्टीट्यूट व सेंटर पीपीपी मोड में राज्य सरकार, एनजीओ, निजी कंपनी आदि खोल सकेंगे। इसके लिए 10 से15 एकड़ जमीन होनी चाहिए प्रशिक्षण संस्थान के लिए।

रोडरेज की बड़ी घटना-
– 25 जुलाई, 2017- विवेक विहार में स्कूटी छू जाने पर 12 वीं के छात्र पर रॉड से हमला
– 05 जनवरी, 2017- कल्याणपुरी में साइकिल छू जाने पर युवक को दौड़ा-दौड़ा कर चाकू घोंपा
– 05 दिसम्बर, 2016- न्यू अशोक नगर में कार छू जाने को लेकर हुई रोडरेज में गोली मारकर हत्या की

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