क्या ईश्वर एक है या अनेक हैं? एक है तो क्या वह साकार है या निराकार है?…..

हमने यहां आपके मन में उत्पन्न हो रहे सभी सवालों में से 1 सवाल को प्रमुख रूप से लेकर उसके उत्तर को शास्त्र पढ़कर प्रस्तुत किया है। आप उनके बारे में अधिक से अधिक जानने का प्रयास करेंगे तो ज्ञानवर्धन होगा, क्योंकि यहां संक्षिप्त रूप में उत्तर दिए जा रहे हैं।

प्रश्न: क्या ईश्वर एक है या अनेक हैं? एक है तो क्या वह साकार है या निराकार है? यदि ऐसा है तो फिर देवी और देवता कौन हैं? फिर मंदिर में ईश्‍वर की प्रार्थना क्यों नहीं होती?

उत्तर: ईश्‍वर एक है और वह निराकार है। ‘एकम् ब्रह्म, द्वितीय नास्ते, नेह-नये नास्ते, नास्ते किंचन’ अर्थात ईश्वर एक ही है, दूसरा नहीं है, नहीं है, नहीं है, जरा भी नहीं है। -ब्रह्म सूत्र

ईश्वर के प्रतिनिधि देवी, देवता और भगवान हैं। देवताओं की मुख्‍य संख्‍या 33 बताई गई है, लेकिन उनके गण सैकड़ों हैं। राम और कृष्ण आदि देवता नहीं हैं, ये सभी भगवान हैं।

मंदिर, देवालय, द्वारा और शिवालय ये सभी अलग-अलग होते हैं, लेकिन आजकल सभी को मंदिर माना जाता है। ईश्वर या परब्रह्म को पुराणों में शिव या सदाशिव के नाम से जाना गया है। मंदिर में जाकर भी निराकार ईश्वर के प्रति संध्यावंदन की जाती है।

ईश्वर न तो भगवान है, न देवता, न दानव और न ही प्रकृति या उसकी अन्य कोई शक्ति। ‍ईश्वर एक ही है, अलग-अलग नहीं। ईश्वर अजन्मा है। जिन्होंने जन्म लिया है और जो मृत्यु को प्राप्त हो गए हैं या फिर अजर-अमर हो गए हैं, वे सभी ईश्वर नहीं हैं।

‘न तस्य प्रतिमा अस्ति’ अर्थात उसकी कोई मूर्ति (पिक्चर, फोटो, छवि, मूर्ति आदि) नहीं हो सकती। ‘न सम्द्रसे तिस्थति रूपम् अस्य, न कक्सुसा पश्यति कस कनैनम’ अर्थात उसे कोई देख नहीं सकता, उसको किसी की भी आंखों से देखा नहीं जा सकता। -छांदोग्य और श्वेताश्वेतारा उपनिषद।
‘जिसे कोई नेत्रों से भी नहीं देख सकता, परंतु जिसके द्वारा नेत्रों को दर्शन शक्ति प्राप्त होती है, तू उसे ही ईश्वर जान। नेत्रों द्वारा दिखाई देने वाले जिस तत्व की मनुष्य उपासना करते हैं, वह ईश्‍वर नहीं है। जिनके शब्द को कानों द्वारा कोई सुन नहीं सकता किंतु जिनसे इन कानों को सुनने की क्षमता प्राप्त होती है उसी को तू ईश्वर समझ। परंतु कानों द्वारा सुने जाने वाले जिस तत्व की उपासना की जाती है, वह ईश्वर नहीं है। जो प्राण के द्वारा प्रेरित नहीं होता किंतु जिससे प्राणशक्ति प्रेरणा प्राप्त करता है उसे तू ईश्‍वर जान। प्राणशक्ति से चेष्टावान हुए जिन तत्वों की उपासना की जाती है, वह ईश्‍वर नहीं है।’ 4, 5, 6, 7, 8। -केनोपनिषद।

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