सहजन के रस मिट जाती है 150 तरह की बीमारियां, एक बार जरूर करें जीवन में इसका सेवन

सहजन की खेती कम समय में मुनाफे का सौदा साबित होने वाली फसल है। कम लागत में तैयार होने वाली इस फसल की खासियत ये है कि इसकी एक बार बुवाई के बाद चार साल तक बुवाई नहीं करनी पड़ती है।

 

सहजन की फलियों का सेवन अनेक प्रकार के रोगों से दूर रखता है। इसके फूल पत्ती, फली, तना और जड़ में कई तरह के रोगों को दूर करने की क्षमता है। आयुर्वेद में इसे शरीर को निरोगी रखने वाली वनस्पति बताया गया है। इसकी छाल, जड़, फूल और फलियों व बीजों में करीब 200 तरह की बीमारियों का इलाज छिपा है।
सहजन की फली, हरी और सूखी पत्तियों में कार्बोहाइड्रेट, प्रोटीन, कैल्शियम , पोटेशियम, आयरन, मैग्रीशियम, विटामिन ए, बी,सी और बी कॉम्प्लेक्स प्रचुर मात्रा में पाया जाता है। उत्तर भारत में पाए जाने वाले सहजन के वृक्ष साल में केेवल एक बार फलते हैं जबकि दक्षिण भारत में साल भर फलते हैं। सहजन को सहजना, सुजना, सेंजन और मुनगा नाम से भी जानते हैं। सहजन के विभिन्न अंगों के रस को मधुर, वातघ्न, रुचिकारक, वेदनाशक, पाचक आदि गुणों के रूप में जाना जाता है। सहजन में दूध की तुलना में चार गुना कैल्शियम  और दोगुना प्रोटीन पाया जाता है।

सहजन का रस सुबह-शाम पीने से हाई ब्लड प्रेशर में लाभ होता है। इसकी पत्तियों के रस के सेवन से मोटापा धीरे-धीरे कम होने लगता है। इसकी छाल के काढ़े से कुल्ला करने पर दांतों के कीड़े नष्ट होते है और दर्द में आराम मिलता है। इसके कोमल पत्तों का साग खाने से कब्ज दूर होता है। इसके अलावा इसकी जड़ के काढ़े को सेंधा नमक और हींग के साथ पीने से मिर्गी के दौरों में लाभ होता है। इसकी पत्तियों को पीसकर लगाने से घाव और सूजन ठीक होती है।

कैंसर और शरीर में बनी गांठ, फोड़ा आदि में सहजन की जड़ का अजवाइन, हींग और सौंठ के साथ काढ़ा बनाकर पीने का प्रचलन है। देखा गया है कि यह काढ़ा साइटिका, पैरों में दर्द, जोड़ों में दर्द, लकवा, दमा, सूजन, पथरी आदि में लाभकारी है। सहजन की गोंद को जोड़ों के दर्द और शहद को दमा आदि रोगों में लाभदायक माना जाता है। आज भी ग्रामीणों की ऐसी मान्यता है कि सहजन के प्रयोग से वायरस से होने वाले रोग, जैसे चेचक के होने का खतरा टल जाता है।

सहजन की फली की सब्जी खाने से पुराने गठिया, जोड़ों के दर्द, वायु संचय, वात रोगों में लाभ होता है। इसके ताजे पत्तों का रस कान में डालने से दर्द ठीक हो जाता है। साथ ही इसकी सब्जी खाने से गुर्दे और मूत्राशय की पथरी कटकर निकल जाती है। सेंधा नमक और हींग डालकर  इसकी जड़ की छाल का काढ़ा पीने से पित्ताशय की पथरी में लाभ होता है। सहजन के पत्तों का रस बच्चों के पेट के कीड़े निकालता है और उल्टी-दस्त भी रोकता है।
सहजन के बीज से पानी को काफी हद तक शुद्ध करके पेयजल के रूप में इस्तेमाल किया जाता है। इसके बीज को चूर्ण के रूप में पीसकर पानी में मिलाया जाता है। पानी में घुल कर यह एक नेचुरल क्लेरीफिकेशन एजेंट बन जाता है। यह न सिर्फ पानी को बैक्टीरिया रहित बनाता है, बल्कि यह पानी की सांद्रता को भी बढ़ाता है।
सहजन में हाई मात्रा में ओलिक एसिड होता है, जो कि एक प्रकार का मोनोसैच्युरेटेड फैट है और यह शरीर के लिए अति आवश्यक है। सहजन में विटामिन-सी की मात्रा बहुत होती है। यह शरीर के कई रोगों से लड़ता है, खासतौर पर सर्दी-जुकाम से। यदि सर्दी की वजह से नाक-कान बंद हो चुके हैं तो, आप सहजन को पानी में उबालकर उस पानी का भाप लें। इससे जकडऩ कम होगी।
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