ये 10 बदलाव हो तो समझ लीजिए बीमारी की चपेट में है शरीर

मरीज को होने वाली बीमारियों का पता लगाने के लिए डॉक्टर एमआरआई(MRI), एक्स रे और न जाने कौन-कौन से मेडिकल टेस्ट का सहारा लेते हैं। इसी से बीमारी के सही कारण पता लगाकर इलाज शुरू किया जाता है। वहीं,पुराने समय में बीमारियों का पता चेहरे के बदलते हाव-भाव से लगाया जाता था। जिसे आयुर्वेद में फेस मैपिंग (Face Mapping) कहा जाता है। चेहरे पर होने वाले बदलावों को नजरअंदाज न करके खुद की सेहत का ख्याल रखना बहुत जरूरी है ताकि सही समय पर इसकी जांच करवाकर इलाज शुरू किया जा सके।
1. डबल ठुड्डी (Receding chin)
ठुड्डी का डबल होना, जिसे डबल चिन भी कहा जाता है। इसे बढ़ती उम्र या फिर मोटापे की निशानी माना जाता है। जिसे मेडिकल में  रेट्रोजेनिया (receding chin) कहा जाता है। इस आम लगने वाली परेशानी को जेनेटिक्स की वजह माना जाता है। यह पियरे रॉबिन (Pierre Robin) और ट्रेचर कॉलिंस (Treacher Collins) सिंड्रोम के कारण हो सकते हैं। इस बीमारी चेहरे का आकार खराब होना शुरू हो जाता है। कुछ डॉक्टर इसके लिए ब्रेसिज़ पहनने का सुझाव देते हैं। इसके लिए सही समय पर इलाज करवाना बहुत जरूरी है।

2. चेहरे पर बालों का उगना (Excessive hair growth)
चेहरे के अनचाहे बालों को हटाने के लिए लड़कियां कई तरह के ब्यूटी ट्रीटमेंट का सहारा लेती हैं। कई बार कुछ महिलाओं की ठुड्डी पर मर्दों की तरह बाल उग जाते हैं। असल में यह ब्यूटी नहीं बल्कि हैल्थ प्रॉब्लम है। इस प्रॉब्लम को Hirsutism कहा जाता है। यह शरीर में हार्मोनल इंबैलेंस की वजह से होता है।

3. चेहरे का पीलापन (Pale skin)
चेहरे का रंग पीला होना एनिमिया की निशानी माना जाता है। यह परेशानी में सेहत की तरफ ध्यान देना बहुत जरूरी है क्योंकि खून की कमी के अलावा बॉडी में ब्लड फ्लो का धीमा होना, लो ऑक्सीजन,विटामिन डी की कमी,ब्लड प्रैशर का लो होना आदि हो सकते हैं। इसके लिए डॉक्टर से संपर्क करना बहुत जरूरी है।

4. फटे हुए होंठ (Cracked lips)
होठों का फटने का कारण शुष्क मौसम या फिर शरीर में पानी की कमी माने जाते हैं लेकिन साधारण सी लगने वाली यह परेशानी गंभीर हो सकती है। लगातार होंठों का फटना चीलाइटिस (cheilitis) या हर्पस(herpes) वायरस की वजह हो सकता है।चेलाइटिस धूप के संपर्क में ज्यादा देर तक रहने की वजह से होता है। जिससे होंठों के आसपास सफेद रंग की आउटलाइन बननी शुरू हो जाती है। इसका सही समय पर इलाज न किया जाए तो इससे स्किन कैंसर होने का खतरा बढ़ जाता है। हर्पस वायरस से होठों का रूखा-सूखा होना,त्वचा में पीलापन और ड्राइनेस हो सकती है। इस इंफैक्शन से बचने के लिए चेहरे पर दिखाई देने वाले संकेतों से बचना बहुत जरूरी है।
5. मस्से (Moles)
स्किन पर होने वाले मस्सों को आम माना जाता है। अगर इनका आकार और रंग लगातार बढ़ रहा है तो डॉक्टरी जांच करवाना बहुत जरूरी है।

6. घाव (Sores)
होंठ या फिर नाक के पास होने वाले घाव परेशानी का कारण बन सकते हैं। यह टाइप 1 हर्पीस वायरस का कारण हो सकते हैं। इन घावों का ठीक होने के बाद बार-बार हो जाना तनाव,खराब सेहत,धूप में ज्यादा देर तक रहना आदि हो सकते हैं। इसे इग्नोर न करें कारण जानने के लिए डॉक्टरी जांच करवाएं।

7. फेशियल पेरालाइसिस (Facial paralysis)
चेहरे पर पेरालाइस गंभीर विषय है। इस बीमारी में चेहरे टेढ़ा हो जाता है और जबड़ों के आसपास और कानों के पीछे दर्द की शिकायत होती है। इस तरह का पेरालाइस एक प्रकार का वायरस है जो चेहरे की नसों को दबाता है, जिससे दर्द और सूजन आ जाती है। इसे 3 से 6 महीने के बीच ठीक किया जा सकता है।
8. जबड़ों के आसपास मुंहासे (Acne around the jawline)
मुंहासे होना आम परेशानी है लेेकिन औरतों के जबड़ो के आसपास पिंपल का ठीक न होने का कारण हॉर्मोंस में गड़बड़ी,विटामिन बी की कमी या फिर PCOS हो सकता है।

9. कानों में खराश (Itchy ears)
कानों में इयरवैक्स के कारण खुजली होना आम परेशानी है। इससे छुटकारा पाने के लिए लोग कई तरह की ड्रॉप्स कानों में डालते हैं, कई बार तो एयर बड्स से भी कान साफ करते हैं। ऐसा गंदगी नहीं बल्कि कानों में होने वाली इंफैक्शन के कारण होता है। जिसकी वजह एक्जिमा या फिर सोरायसिस भी हो सकती है।

10 माथे पर रेखाएं ( Horizontal lines on the forehead)
माथे पर उभरी हुई रेखाएं बढती उम्र की निशानी मानी जाती है लेकिन Horizontal लाइन्स स्ट्रेस,खान-पान में गड़बड़ी,पेट से जुड़ी परेशानियां आदि हो सकती हैं। इसके अलावा चीनी का ज्यादा सेवन और फैट फूड्स को डाइट में शामिल करने से भी माथे पर इस तरह की लकीरे दिखाई देने लगती हैं।

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