फेसबुक ने फेक न्यूज पर लगाम लगाने के लिए FACEBOOK ने भारत में उठाया ठोस कदम

POLAND, Warsaw - December 21, 2016. The European Commission is investigating potentially false claims that Facebook cannot merge user information from the messaging network WhatsApp which it acquired in 2014. (Photo by Jaap Arriens/NurPhoto via Getty Images)

इलेक्शन को लेकर फेसबुक लगातार सवालों के घेरे में है। मार्क जकरबर्ग प्राइवेसी और इलेक्शन कैंपेन को लेकर अमेरिकी कांग्रेस के सामने लगभग 500 सवालों का जवाब दे चुके हैं।

कर्नाटक में चुनाव है और इससे पहले फेसबुक ने फेक न्यूज पर लगाम लगाने के लिए थर्ड पार्टी फैक्ट चेक शुरू किया है। कंपनी ने फिलहाल इसे पायलट प्रोग्राम के तहत शुरू किया है जो कर्नाटक चुनाव को लेकर काफी महत्वपूर्ण है।

 

फेसबुक ने कहा है कि फैक्ट चेकिंग प्रोग्राम शुरू करने का मकसद फर्जी खबरों को फैलने से रोकना और उससे लड़ना है। फेसबुक ने फैक्ट चेकिंग इंडिपेंडेंट डिजिटल जर्नलिज्म एजेंसी बूम के के साथ पार्टनर्शिप की है। बूम नाम की यह एजेंसी इंटरनेशन फैक्ट चेकिंग नेटवर्क से सर्टिफाइड है।

यह फैक्ट चेकिंग एजेंसी इंग्लिश खबरों को रिव्यू करेगी जिन्हें फ्लैग किया गया है। यहां से खबरों को छह तरह की रेटिंग दी जाएगी। इनमें False, Mixture, True और not rated शामिल हैं। अगर फैक्ट चेक करने वाली एजेंसी किसी खबर को False रेट करती है तो फेसबुक इसे न्यूज फीड में नीचे कर देगा। इतना ही नहीं फेसबुक लोगों और पेज ऐडमिन को बताएगा कि वो गलत खबरें शेयर कर रहे हैं। अगर पहले शेयर किया है तो भी नोटिफिकेशन के जरिए बताया जाएगा कि ये खबर फर्जी है।

फेसबुक के मुताबिक जिस पेज से लगातार ऐसी खबरें पोस्ट होंगी जो फर्जी होंगी तो फेसबुक उनके पोस्ट की पहुंच 80 फीसदी तक कम कर देगा। इसके अलावा विज्ञापन से उन्हें पैसे कमाने में भी मुश्किलें होंगी।

गौरतलब है कि फेसबुक पहली बार भारत में किसी थर्ड पार्टी फैक्ट चेकर्स कंपनी के साथ पार्टनर्शिप कर रही है ताकि फर्जी खबरों से निपटा जा सके। फेसबुक ने कहा है, ‘हम छोटी शुरुआत कर रहे हैं और हमें पता है कि इस तरह के टेस्ट से सीखना और अपनी कम्यूनिटी को सुनना अहम है।’

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