किडनैपिंग कॉल से फर्जी पैथोलॉजी लैब का हुआ पर्दाफाश….

दिल्ली के उत्तर पश्चिम इलाके महेंद्र पार्क में स्थित इस फर्जी लैब को चलाने वाले दो भाई अपने बिजनेस को विस्तार देने में लगे हुए थे जिसके लिए वो यूपी में एक किराए का कमरा भी लेने वाले थे। लेकिन ये दोनो भाई अपनी इस योजना को अंजाम तक पहुंचा पाते उससे पहले ही पुलिस ने उन्हें दबोच लिया।

बता दें कि एक लड़की की ओर से पीसीआर को की गई एक कॉल से इस पूरे मामले का पर्दाफाश हुआ था, जिसे आरोपी अजय और संजय यादव ने अपनी गैरमौजूदगी में कोरियर बॉयज से सैंपल कलेक्ट करने के लिए हायर किया था। सीनियर पुलिस अधिकारी ने बताया उन्हें एक लड़की का कॉल आया था जिसने बताया कि खुद को सीबीआई अधिकारी बताने वाला एक शख्स उसके एंप्लायर को ले गया है। उसने बताया कि सीबीआई अफसर ने कहा था कि वह संजय को दो घंटे के बाद छोड़ देगा, लेकिन 6 घंटे बाद भी संजय के बारे में कोई जानकारी नहीं मिल सकी है।

उत्तर पश्चिम दिल्ली के डीसीपी असलम खान ने कहा कि जब पुलिस ने संजय से संपर्क साधने की कोशिश की तो उसका फोन स्विच ऑफ था। महेंद्र पार्क के एसएचओ वीरेंद्र कादयान के नेतृत्व में जब पुलिस की एक टीम पैथ लैब में गई तो वहां की स्थिति बहुत खराब थी। पुलिस ने मौंके पर मौजूद एक युवती से टेस्टिंग मशीनों के बारे में पूछा तो वह कुछ न बता सकी। लड़की ने कहा कि वो यहां अभी चार दिन पहले ही नौकरी पर आई है।

पुलिस के मुताबिक कुछ मिनटो के बाद ही अजय लैब में आया जब उससे मशीनों के बारे में पूछा गया तो वह कुछ न बता सका। थोड़ी देर की पूछताज के बाद उसने पुलिस को इस फर्जी लैब का सच बता दिया। हालांकि पुलिस ने जब सीबीआई अधिकारियों से लैब में किसी को भेजे जाने के बारे में पूछा तो उन्होंने साफ इनकार किया

पुलिस ने इसके बाद संजय के फोन को ट्रैक किया। इससे पता चला कि संजय की आखिरी लोकेशन बाहरी दिल्ली के एक बैंक की थी, जहां उसने पैसे निकाले थे। इसके बाद बैंक की सीसीटीवी फुटेज को स्कैन किया गया और उसकी पहचान हो गई। कुछ देर बाद ही पुलिस ने उसे अरेस्ट कर लिया। पुलिस के मुताबिक संजय का भाई अजय इस पूरे रैकेट का मास्टरमाइंड था।

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