अगर आपने भूलकर भी किया ये काम तो आपको हो सकती है फांसी…

नए अध्यादेश के मुताबिक, 12 साल से कम उम्र के बच्चों से दुष्कर्म करने वालों को मौत की सजा दी जाएगी। 16 साल से कम उम्र की लड़की से रेप करने वाले को दी जाने वाली कम से कम सजा 10 साल से बढ़ाकर 20 साल की गई है।

यह पहला मौका नहीं है जब किसी अपराध में मौत की सजा का प्रावधान किया गया है। कई ऐसे अपराध हैं, जिन्हें करने पर सजा-ए-मौत की सजा का प्रावधान है। हाईकोर्ट एडवोकेट संजय मेहराने बताया कि मर्डर करने पर दोषी व्यक्ति को अधिकतर कोर्ट उम्रकैद की सजा सुनाती है लेकिन मामला रेयरेस्ट ऑफ रेयर का हो तो फांसी की सजा भी दी जाती है। हालांकि ऐसे मामले में कोर्ट दोषी को फांसी की सजा तभी सुनाती है जब परिस्थितियों, फैक्ट्स और केस के आधार पर ऐसा करना जरूरी लगे। IPC की धारा 132 के तहत आपने सरकार के खिलाफ सशस्त्र विद्रोह किया तब भी आपको फांसी की सजा हो सकती है।

भारत ने यूएन के रेजोल्यूशन के अगेंस्ट वोटिंग की थी जिसमें फांसी की सजा पर रोक लगाने की बात कही गई थी। हालांकि भारत में जितने अपराधियों को अब तक फांसी की सजा सुनाई गई है, उसमें से कईयों को फांसी नहीं दी गई। एमनेस्टी इंटरनेशनल के अनुसार, इंडिया में 2007 में 100, 2006 में 40, 2005 में 77, 2002 में 23 और 2001 में 33 दोषियों को फांसी की सजा सुनाई गई लेकिन इनमें सभी को फांसी दी नहीं गई। इंडिया के मुकाबले चाइना, ईरान, साउदी अरब, यूएस और पाकिस्तान जैसे देशों में फांसी की सजा सख्ती से दी जाती है।

 

आंकड़ों के अनुसार, 2001 से 2011 के बीच 1455 दोषियों को मृत्युदंड दिया गया लेकिन औसत हर साल 132 दोषियों को डेथ पेनाल्टी मिली लेकिन इनमें से अधिकतर की सजा उम्रकैद में बदल गई। इस पीरियड में सिर्फ 14 साल की बच्ची के साथ कोलकाता में रेप करने वाले धननजॉय चटर्जी (2004) को फांसी पर लटाकया गया।

1995 के बाद यह दूसरा मौका था। 27 अप्रैल 1995 को सीरियल किलर शंकर को फांसी पर लटकाया गया था। इसके बाद सिर्फ तीन दोषियों को फांसी की सजा दी गई। इसमें मुंबई पर हमला करने वाले अजमल कसाब, पार्लियामेंट पर अटैक करने वाले अफजल गुरू और मुंबई सीरियर ब्लास्ट केस के दोषी याकूब मेमन का नाम शामिल है।

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