इस गावं में पहली बार थाने में दर्ज हुई शिकायत….

आज़ादी के इतने सालों बाद भी कई गांव ऐसे है जिन्हें अपने अधिकारों के बारे में कुछ नहीं पता है। आज भी कई गांव ऐसे है जहां लड़ाई झगड़ो का समाधान गांव के बुजुर्गों द्वारा निकला जाता है।

उन्ही गांव में से एक ठेकड़ी गांव था। इस गांव में पहली बार ग्राम पंचायत का चुनाव हुआ था। आजादी के बाद पहली बार ग्राम पंचायत बनने पर ठेकड़ी गांव के लोगों ने थाने का मुंह देखा। पंचायत चुनाव के दौरान गुटबाजी में हुए झगड़े के बाद पहली बार थाने में मामला दर्ज किया गया। इससे पहले अब तक गांव के सभी छोटे और बड़े मामलों को गांव के बुजुर्ग पंचायत कर आसानी से निपटा लेते थे। इससे गांव में अमन और भाईचारा बना था।

ठेकड़ी और ग्यासनियानबास गांव पहले नगरपालिका में शामिल थे। इन दोनों गावों के लोग विधानसभा और लोकसभा की वोट डालते थे। इनको नगरपालिका या फिर पंचायत के चुनावों में वोट डालने का अधिकार नहीं था। गांव की आबादी करीब 700 है। यहां इतना भाईचारा, प्रेम प्यार था कि गांव में चाहे कितना भी बड़ा मामला आपस में हो जाए, बड़े बुजुर्ग उसे आपसी सहमति से निपटा देते थे। उनका फैसला हर किसी को मान्य होता था। पंचायत में सभी वर्गों की भागीदारी होती थी। ऐसे में किसी खास का पक्ष लेने का कोई विवाद भी नहीं होता था।

 

ग्रामीणों की मांग पर 2017 में ठेकड़ी और ग्यासनियानबास गांवों की पंचायत का गठन फिरोजपुर झिरका ग्रामीण के नाम से किया गया। 28 जून 2017 को ग्राम पंचायत का चुनाव हुआ। इसमें ठेकड़ी गांव की मिस्कीना सरपंच चुनी गईं। बताया जा रहा है कि सरपंच चुनाव से 3 माह पहले ही उनकी गांव में शादी हुई थी। ग्राम पंचायत बनने के बाद से ही गांव में पार्टीबाजी शुरू हो गई।

10 मार्च 2018 को ठेकड़ी गांव के दोनों गुट के लोगों में लड़ाई-झगड़ा हुआ था। मामला आपस में नहीं निपटने पर थाने में एफआईआर दर्ज हुई। हालांकि इस मामले को लेकर दो बार पंचायत हुई। पंचायत में फैसला भी कर दिया गया, लेकिन वह सिरे नहीं चढ़ सका। इसके बाद लोगों ने थाने का मुंह देखा। गांव के बुजुर्ग लोगों का कहना है कि गांव में पंचायत क्या बनी अब तो गांव का अमन-चैन और भाईचारा समाप्त हो गया है।

 

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