ऑनलाइन फ्रॉड का शिकार होने से बचें,पाएं अपनी खोई रकम वापस….

अगर आप जान बूझकर या अनजाने में किसी के साथ एटीएम पिन, कार्ड नंबर जैसी गोपनीय जानकारी शेयर करती हैं, तो उसे लेनदेन के बारे में सूचित करने तक उसे पूरा नुकसान उठाना होगा। ऐसे मामलों में अगर ग्राहक बैंक को चार या सात दिनों के अंदर जानकारी देता है, तो ग्राहक की देयता 10,000 रुपये तक सीमित होगी। इसमें जो भी कम होगा. यह शर्त बचत बैंक खातों और उन क्रेडिट कार्ड के लिए लागू है, जिनकी लिमिट 5 लाख रुपये तक होती है। चालू खाते की लिमिट 25 लाख रुपये तक की है

नेटबैंकिंग के यूज बढ़ने के साथ ही ऑनलाइन ठगी का क्रेज भी बढ़ता जा रहा है। कुछ तरीके अपनाकर आप अपना निकाली जा चुकी राशि को दोबारा पा सकते हैं।

बता दें कि RBI की नई गाइडलाइंस के मुताबिक, अगर आप तय समय के अंदर धोखाधड़ी की सूचना बैंक को देते हैं, तो बैंक को उस नुकसान की पूरी भरपाई करनी होगी। हाल ही में अवैध इलेक्ट्रोनिक लेन-देन के को लेकर अधिसूचना जारी की गई है, जिसमें कहा गया है कि बैंक को डिजिटल लेन देन को सुरक्ष‍ित बनाने के लिए अपने तंत्र को मजबूत करना होगा।

पहले बैंक की तरफ से पैसे देने में काफी समय लगता था, लेकिन नई अधिसूचना के मुताबिक, इन मामलों में बैंक पूरे नुकसान के लिए भुगतान करेंगे। अगर कभी बैंक की कमी या लापरवाही की वजह से आपके साथ धोखाधड़ी होती है, तो बैंकों को आपको पूरे नुकसान की भरपाई करनी होगी। ऐसे मामलों में ये जरूरी नहीं है कि ग्राहक ने बैंक को सूचना दी थी या नहीं, बैंक को हर हालत में भरपाई करनी होगी।

 

जानकारी के लिए बता दें कि डिजिटल लेन देन के दौरान जिन-जिन के भी प्लेटफॉर्म से डाटा गुजरता है, तो उसे एन्क्र‍िप्ट किया जाता है। और इस दौरान डाटा शेयर नहीं किया जाना चाहिए। अगर गड़बड़ी की वजह से आपके साथ धोखाधड़ी होती है, तो आप इसके लिए जिम्मेदार नहीं रहेंगे। आरबीआई के मुताबिक अगर धोखाधड़ी के किसी मामले में बैंक और ग्राहक की तरफ से गलती ना होकर किसी थर्ड पार्टी के सिस्टम की वजह से गलती हुई है। तो तीन दिन के अंदर बैंक को जानकारी देने पर बैंक को आपके नुकसान की भरपाई करनी होगी।

 

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