बड़ी खबर : देश में खेती का तरीका बदल कार्बन उत्सर्जन घटाया जाएगा

भारत कार्बन उत्सर्जन में कटौती करने के लक्ष्यों को हासिल करने के लिए एकीकृत कृषि परियोजना को लागू करेगा। इस योजना का मकसद खेती के तरीकों में थोड़ा बदलाव कर कार्बन उत्सर्जन घटाना है। परियोजना के लिए उत्तराखंड के वन्य जीव गलियारा सहित देश के पांच क्षेत्रों को चिह्नित किया गया है, जो पारिस्थितिकीय लिहाज से अतिसंवेदनशील व संपन्न है। यह कार्यक्रम संयुक्त राष्ट्र की संस्था खाद्य व कृषि संगठन (एफएओ)और वैश्विक पर्यावरण सुविधा (जीईएफ)की वैश्विक पहल है।

इसमें भारत सरकार और संबंधित राज्यों के कृत्रि मंत्रालय शामिल हैं। परियोजना में 18 एजेंसियों के अलावा भारत सहित 183 देश साझेदारी कर रहे हैं। कार्यक्रम के तहत मध्यप्रदेश के चंबल क्षेत्र, मिजोरम के दाम्पा, ओडिशा के सिमिलपाल, राजस्थान के जैसलमेर व बाड़मेर और उत्तराखंड के वन्य जीव गलियारे को शामिल किया गया है। एफएओ के जेफरी ग्रेफीन ने कहा, इस योजना के पीछे सोच यह है कि एकीकृत पर्यावरर्ण ंचताओं को कृषि कार्यों और नीतियों से जोड़ा जाए।

10 करोड़ आदिवासी होंगे लाभांवित

ये पांच क्षेत्र जैव विविधिता के लिहाज से अति महत्वपूर्ण है। देश की 30 करोड़ आदिवासी आबादी में एक तिहाई इन्ही क्षेत्रों में निवास करती है। यहां जैव विविधिता भी प्रचुर मात्रा में है। लेकिन जलवायु परिवर्तन के कारण यहां की पारिस्थितिकीय और कृषि खतरे में है। खासतौर पर भूमि की कम होती उर्वरता के खतरे से।

कार्बन उत्सर्जन कम होगा 

परियोजना का लक्ष्य 2018 से 2025 तक कृषि क्षेत्र से होने वाले कार्बन उत्सर्जन में 4.99 करोड़ टन की कटौती करना है। ताकि कृषि पारिस्थिति तंत्र को सुधारा जा सके। कृषि मंत्रालय में संयुक्त सचिव अल्का भार्गव ने कहा, यह कार्यक्रम टिकाऊ कृषि के लिए देश में चल रही विभिन्न परियोजनाओं के लिए एकीकृत राष्ट्रीय मंच की तरह काम करेगा। वहीं एएफओ ने कहा, कृषि मुख्यत: तीन तरह के हानिकारक गैसों का उत्सर्जन करते हैं। पहला जुताई से कार्बन डाई ऑक्साइड,दूसरा पशुधन से मीथेन गैस और उर्वरक से नाइट्रोजन आधारित ऑक्साइड।

कहां क्या चुनौतियां 

 मध्यप्रदेश

– 97,982 हेक्टयर चंबल के इलाके को योजना के तहत शामिल किया

– कटान, जंगलों की कटाई और रासायनिक उर्वरक सबसे बड़ा खतरा

मिजोरम 

– डम्पा टाइगर रिजर्व और थोरांगटलांग वन्यजीव अभ्यारण्य योजना के अंतर्गत

-1,45,670 हेक्टेयर में फैले लुंगेई और ममित क्षेत्र को भी लाभ

ओडिशा 

– 5,56,900 हेक्टेयर क्षेत्र को परियोजना के लिए चिह्नित किया गया

– यूनेस्को से मान्यता प्राप्त सिमिलपाल आरक्षित क्षेत्र भी शामिल

राजस्थान 

– जैसलमेर और बाडमेर में मरुस्थल राष्ट्रीय पार्क बनाने का प्रस्ताव

– 3,16,200 हेक्टेयर क्षेत्र में टिकाऊ पारिस्थितिकी तंत्र बनाया जाएगा

उत्तराखंड 

– कार्बेट टाइगर रिजर्व और राजाजी टाइगर रिजर्व योजना में शामिल

– 3,24,696 हेक्टेयर क्षेत्र नैनीताल, पौड़ी गढ़वाल, अलमोड़ा, देहरादून और हरिद्वार के

ऐसे होगा वित्तपोषण 

– 90.2 करोड़ डॉलर (करीब 6,500 करोड़ रुपये) कुल लागत का अनुमान ’ 3.35 करोड़ डॉलरग्रांट के रूप में जीईएफ देगा

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