छह दिनों में 68 गाय मरीं, घुम्मनहेड़ा गौशाला में नहीं रुक रहा मौत का सिलसिला

घुम्मनहेड़ा गौशाला में शनिवार को 12 और गायों की मौत हो गई है। इन्हें मिलकर पिछले छह दिनों में यहां 68 गायों की जान जा चुकी है। इसके बाद देर रात तक यहां मौजूद अन्य गायों को दूसरी गौशालाओं में भेज दिया गया है। जानकारी के अनुसार, घुम्मनहेड़ा गौशाला में शुक्रवार को 56 गायों की मौत की सूचना मिलने के बाद पशुपालन विभाग के डॉक्टरों की टीम यहां गायों की जांच के लिए पहुंची थी। बावजूद, शनिवार सुबह गौशाला में मौजूद 12 और गायों ने दम तोड़ दिया।

डॉक्टरों की टीम की मानें तो मरने वाली अधिकतर गायों के खुर पक्क गए थे। इससे उन्हें संक्रमण हुआ। सही समय पर इलाज नहीं मिल पाने के कारण उनकी मौत होने की आशंका जताई जा रही है। इतना ही नहीं, डॉक्टरों का कहना है कि कई गायों में अभी भी गंभीर संक्रमण है, जिनका उपचार शुरू कर दिया गया है।

1332 गायों की जगह बदली : दक्षिण पश्चिमी जिले के डीएम अभिषेक कुमार टीम के साथ शनिवार को गौशाला पहुंचे। उन्होंने घुम्मनहेड़ा गौशाला का मुआयना करने के बाद स्थानीय एसडीएम को जल्द से जल्द 1332 गायों को दूसरी जगह भेजने का आदेश दिया। साथ ही, गौशाला संचालकों को बीमार गायों को स्वास्थ्य संबंधित जरूरतों के हिसाब से जल्द से जल्द उपचार देने को कहा गया, ताकि बीमार गायों को बचाया जा सके। पांच गौशालाओं को सूचना दी गई और शनिवार देर रात तक सभी गायों को दूसरी जगह भेज दिया गया।

दिल्ली सरकार विकास आयुक्त दिलराज कौर ने बताया, ‘मृत गायों के पोस्टमार्टम का काम शुरू कर दिया गया है। रिपोर्ट आने के बाद ही उनकी मौत का सही कारण पता चलेगा। घुम्मनहेड़ा गौशाला में मौजूद अन्य गायों को दूसरी जगह भेज दिया गया है।’

पोस्टमार्टम के लिए पांच डॉक्टरों की टीम गठित की गई 
सभी गायों के शव को पोस्टमार्टम के लिए अस्पताल पहुंचा दिया गया है। शनिवार को पोस्टमार्टम का काम शुरू कर दिया गया है। पांच डॉक्टरों की टीम इसमें लगी है। गायों की संख्या 68 होने के चलते पोस्टमार्टम में काफी समय लगने की बात कही है।

बीमारी का 15 दिन पहले पता चल जाता है 
पशु डॉक्टरों की मानें तो किसी भी गाय की अचानक से मौत नहीं हो सकती। अगर कोई गाय बीमार भी होगी तो उसमें बीमारी के लक्षण करीब 15 दिन पहले से दिखाई देने लगते हैं। आमतौर पर गायों में नूंह खोरी, थनेला, खुर पकना आदि जैसी बीमारियां होती हैं। इनसे संक्रमण फैलने का खतरा होता है और यही बीमारियां एक गाय से दूसरी गाय में फैलती है। मगर, इन बीमारियों का समय पर उपचार किया जाए, तो गायों को आसानी से बचाया जा सकता है।

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