देवरिया शेल्टर होम केसः रात में जाती थीं, सुबह रोते हुए लौटती थीं लड़कियां

उत्तर प्रदेश के देवरिया में भी बिहार के मुजफ्फरपुर शेल्टर होम रेप केस जैसी घटना सामने आई है। यहां शेल्टर होम से भागी लड़की ने जो आरोप शेल्टर होम संचालकों पर लगाए हैं, वे बेहद गंभीर हैं। छुड़ाई गई लड़कियों ने जो कहानी सुनाई है वो रोंगटे खड़े कर देने वाली है। देवरिया के इस शेल्टर होम से 24 लड़कियों को मुक्त कराया गया है और करीब 18 लड़कियां अभी भी गायब हैं। शेल्टर होम को प्रशासन ने सील कर दिया है। लड़कियों ने पुलिस को बताया है कि किस तरह गाड़ियों से लोग शेल्टर होम में आते थे और यहां से लड़कियों को ले जाते थे। इस बीच सीएम योगी आदित्यनाथ ने देवरिया के डीएम को हटाते हुए इस मामले में सख्त कार्रवाई के आदेश दिए हैं।

उत्तर प्रदेश की महिला और बाल विकास मंत्री रीता बहुगुणा जोशी ने कहा, ‘उत्तर प्रदेश के सीएम ने तत्काल कार्रवाई का आदेश दिया है। देवरिया के डीएम सुजीत कुमार को हटा दिया गया है और आगे कार्रवाई के लिए आदेश दिए गए हैं।’

इस बच्ची ने पुलिस को अपनी आपबीती सुनाई। उसने बताया कि वह बिहार की रहने वाली है। उसकी मां की मौत तीन साल पहले हो गई थी। पिता ने दूसरी शादी करके उसे घर से निकाल दिया था। ननिहाल में भी उसे किसी ने आश्रय नहीं दिया। वह सड़क पर आ गई तो कुछ लोगों ने पुलिस को सौंप दिया। पुलिस ने उसे इस शेल्टर होम में लाकर रख दिया था। तब से वह यहीं रह रही थी।

‘गाड़ी में बड़ी मैम ले जाती थीं’
लड़की ने बताया कि महिलाओं और लड़कियों को बड़ी मैम ले जाती थीं। कभी सफेद रंग की गाड़ी तो कभी लाल रंग की गाड़ी आती थी। कभी-कभी काले रंग की गाड़ी भी आती थी। इन्हीं गाड़ियों में लड़कियां जाती थीं।

‘रात में जाती और सुबह लौटती थीं लड़कियां ‘
लड़कियों के जाने और आने के समय के बारे में उसने बताया कि शाम को शेल्टर होम से लड़कियां भेजी जाती थीं और सुबह वापस आती थीं। वह कहां जाती थीं, इस बारे में लड़की को कुछ नहीं पता। उसने बताया कि वापस आने के बाद कई लड़कियां रोती थीं। परेशान होती थी और घबराई सी दिखती थीं लेकिन वह कुछ नहीं बोलती थीं।

‘कराते थे सफाई का काम ‘
लड़की ने बताया कि वह वहां शेल्टर होम में साफ-सफाई, बर्तन धोना और झाड़ू लगाने का काम करती थी। अगर कोई किसी से ज्यादा बात करता तो छोटी मैम और बड़ी मैम मिलकर लड़कियों को पीटती थीं।

जब खाली हाथ लौटे थे अधिकारी
वहीं, डीपीओ प्रभात कुमार ने बताया कि संस्था अवैध तरीके से चल रही थी। सीबीआई की जांच के बाद जब इसकी मान्यता खत्म कर दी गई तो शासन से आदेश आया कि संस्था से लड़कियों, महिलाओं और बच्चों को ट्रांसफर कर दिया जाए। वे लोग संस्था खाली कराने पहुंचे लेकिन संचालिका ने उन लोगों के साथ अभद्रता की और उन लोगों को वापस लौटना पड़ा।

दबंगई के आगे पुलिस भी नतमस्तक
इधर एसपी रोहन पी कनय ने बताया कि डीपीओ की तरफ से शेल्टर होम खाली कराने के लिए फोर्स मांगी गई थी। उन्हें फोर्स उपलब्ध करा दी गई थी। जब पुलिस फोर्स के साथ अधिकारी मौके पर पहुंचे तो गिरिजा त्रिपाठी और कंचनलता की दबंगई के आगे उन लोगों को खाली हाथ लौटना पड़ा। वे लोग बिना कार्रवाई के ही वहां से वापस आ गए। हालांकि, इस मामले में पुलिस ने कंचनलता, गिरिजा त्रिपाठी और उनके पति के खिलाफ एफआईआर दर्ज की थी।

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