बड़ी खबर : डॉलर के मुकाबले रुपये के लगातार गिरने से निर्यात भी घटा

डॉलर के मुकाबले रुपये में जारी गिरावट का असर आयात के बाद अब निर्यात पर भी दिखने लगा है। विदेशी खरीदार भारतीय निर्यातकों पर माल के दाम कम करने का दबाव डालने के साथ ही उनके ऑर्डर भी रद्द कर रहे हैं।

फोरम ऑफ इंडियन फूड इंपोर्टर के संयोजक अमित लोहानी ने कहा कि देश में आयात 35 फीसदी तक कम हुआ है, जिसका असर आम लोगों से जुड़ी तमाम चीजों पर पड़ा है। अमूमन माना जाता है कि रुपये में गिरावट से निर्यात बढ़ जाता है लेकिन अब इस क्षेत्र में भी प्रतिकूल असर दिख रहा है। दरअसल, विदेशी खरीदार भारतीय निर्यातकों को चेतावनी देते हैं कि उन्हें घरेलू बाजार में डॉलर के ज्यादा रुपये मिलेंगे, ऐसे में वे उस मार्जिन को कम करें नहीं तो ऑर्डर रद्द कर दिया जाएगा। इस कारण बासमती चावल, फल-सब्जियां और मार्बल के कई ऑर्डर अब तक रद्द हो चुके हैं।

एफआईआईओ के महानिदेशक अजय सहाय ने बताया कि चमड़ा, कपड़ा और कृषि उत्पादों के निर्यात में भारत को मोलभाव का सामना करना पड़ रहा है। जबकि अन्य देश सस्ती दरों पर चीजें बेचने की पेशकश कर देते हैं।

रुपये से पेट्रोल में ‘आग’

देश में पेट्रोल-डीजल की अंधाधुंध बढ़ती कीमतों के लिए रुपये की गिरावट सबसे बड़ा कारक है। पेट्रोलियम मंत्रालय के मुताबिक अंतरराष्ट्रीय बाजार में डॉलर के मुकाबले तेल कीमतें उतनी नहीं बढ़ी हैं, जितना कि खुदरा बाजार में दिखती हैं।

गिरावट के प्रमुख कारण

– रुपये के लगातार अवमूल्यन से भारतीय निर्यातक वैश्विक बाजारों में अपने माल का सही मोल-भाव नहीं कर पा रहे हैं।

– निर्यातक खुद का बचाव करने में सक्षम नहीं हैं, क्योंकि उन्हें यह नहीं मालूम है कि रुपया अगले दिन कितना-गिरने या चढ़ने वाला है।

– चीन ने अपनी करेंसी युआन का 9% अवमूल्यन कर वैश्विक बाजार में निर्यात बनाए रखा जिसका मुकाबला भारतीय निर्यातक नहीं कर पा रहे हैं।

– आयात महंगा होने से कच्चे माल के दाम बढे़ लागत में इजाफा हुआ, विदेशी खरीदार उधारी माल पर भुगतान काटकर दे रहे और निर्यातकों को नुकसान हो रहा।

ऐसे निर्यातकों को लाभ

जिन निर्यातकों ने विदेशी बाजार में लंबे करार किए हैं, उनको रुपये की गिरावट का फायदा हो रहा है। वहीं, ज्यादातर निर्यातकों के लिए हर निर्यात ऑर्डर का अलग रेट तय होता है, लिहाजा ऐसे निर्यातकों के लिए यह  मुश्किल समय है।

डॉलर का ‘डर’

– जनवरी में रुपया डॉलर के मुकाबले 63.46 के स्तर पर था

– रुपया गत 18 सितंबर को 72.98 के स्तर पर पहुंच गया था

– तैयार कपड़ों का निर्यात अप्रैल-अगस्त तक 12.12% घट गया है

– कुल निर्यात में इस दौरान 20.7% का उछाल आया

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