पहले की सरकारें बाढ़ राहत के नाम पर करती थी खेल- गोदी सरकार के सीएम योगी

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शुक्रवार को फर्रुखाबाद ,कन्नौज ,कानपुर और उन्नाव जिले के बाढ़ ग्रस्त इलाकों का हवाई सर्वेक्षण किया। करीब एक घंटे तक हवाई सर्वेक्षण करने के बाद वह बक्सर स्थित चंद्रिका मंदिर प्रांगण में बाढ़ पीड़ितों का दर्द जानने पहुंचे। मां चंडिका का दर्शन करने के बाद मुख्यमंत्री ने यहां मौजूद बाढ़ पीड़ितों को भरोसा दिलाया कि घबराने की जरूरत नहीं है पूरी सरकार उनके साथ इस दुख की घड़ी में खड़ी है। पहले की सरकारों में बाढ़ राहत सामग्री वितरण में खेल होता था। भाजपा की सरकार जब से सूबे की सत्ता में आई है तब से पहले से ही बाढ़ पीड़ितों की मदद के लिए रणनीति तैयार की गई थी। जैसे ही बाढ़ से घिरे इलाकों के बारे में जानकारी हुई तो खुद लोगों का दर्द बांटने निकला हूं।

पूर्व की सरकारें सर्पदंश, बाढ़ से राहत बचाव के दौरान हुई मौत को दैवीय आपदा नहीं मानती थी। भाजपा की सरकार ने इसे भी दैवीय आपदा की श्रेणी में लाते हुए पीड़ित को चार लाख रुपए देने का निर्णय लिया है और लोगों को इसका लाभ भी मिल रहा है। प्रशासन पूरी मुस्तैदी के साथ बाढ़ पीड़ितों की मदद में लगा है। बाढ़ में किसी की गृहस्थी उजड़ गई तो किसी की मौत हो गई सरकार सबके साथ है। बाढ़ का पानी उतरने के बाद मेडिकल कैंप लगाकर लोगों को राहत पहुंचाने का काम किया जाएगा।

मच्छर आदि का प्रकोप ना हो और बीमारियां न फैले इसके लिए दवाओं के छिड़काव का निर्देश दिया गया है। प्रशासन की टीम नुकसान का आकलन कर रही है पीड़ितों को मुआवजा भी शीघ्र उपलब्ध कराया जाएगा। पूरे प्रदेश में जिन जिलों में में बाढ़ का कहर है वहां पर सरकार राहत पहुंचाने का काम कर रही है। प्राकृतिक आपदा के प्रति सरकार बेहद संवेदनशील है। उत्तर प्रदेश के इतिहास में अभी तक इस तरह की सहायता कभी नहीं दी गई। कल भी सीतापुर बस्ती देवरिया समय 4 जिलों का दौरा करके आया हूं। सभी जिला अधिकारियों को निर्देश दिया गया है कि बाढ़ पीड़ितों को फौरी तौर पर 10 किलो आटा, 10 किलो चावल, 2 किलो चना बरसात से बचने के लिए पन्नी उपलब्ध कराएं। ताकि किसी को खाने पीने की कोई दिक्कत ना आ पाए। दैविक आपदा से हम सबको मिलकर निपटना है। इसके लिए जन सहयोग बहुत ही जरूरी है। समाज के सक्षम लोग एकजुट होकर काम करेंगे तो ऐसी आपदाओं से लड़ने में ताकत मिलेगी। आपदा में हुए नुकसान का आकलन करने के लिए उच्च स्तरीय कमेटी का गठन किया गया है। इसकी रिपोर्ट आते ही पीड़ितों को लाभ पहुंचाने का कार्य किया जाएगा।

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