सरकार का बड़ा एलान, 2020 तक मिलती रहेगी यूरिया सब्सिडी

Farmers cast urea fertilizer in a rice plantation on the expropriated and now redistributed farm of El Charcote in the central state of Cojedes October 14, 2010. El Charcote became a symbol of Chavez's socialist revolution when he sent soldiers to seize it in a 2005 push to break up major ranches and repopulate rural areas largely abandoned since Venezuela's oil industry took off in the 1920s. The government recently bought the last 500,000 acres (200,000 hectares) of land on the farm, a vast cattle ranch that until 2005 belonged to one of Britain's wealthiest families, the Vesteys, and 130,000 cattle, part of a new drive by Chavez to increase state control of food in South America's top oil producer. Picture taken October 14, 2010. REUTERS/Carlos Garcia Rawlins (VENEZUELA - Tags: POLITICS ENVIRONMENT AGRICULTURE)

केंद्र सरकार ने यूरिया सब्सिडी की अवधि बढ़ाकर 2020 तक करने और उवर्रक सब्सिडी के वितरण के लिये प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (डायरेक्ट बेनिफ़िट ट्रांसफर) योजना के क्रियान्वयन के प्रस्ताव को बुद्धवार को मंजूरी दे दी।

किसानों को वैधानिक रुप से नियंत्रित कीमत पर 5,360 रुपए प्रति टन के हिसाब से उपलब्ध करवाया जाएगा। फार्म गेट और एमआरपी पर उर्वरक की वितरित लागत के बीच अंतर विनिर्माताओं को सब्सिडी के रूप में दिया जाता है। वित्त वर्ष 2018-19 के लिए यूरिया सब्सिडी के 45,000 करोड़ रुपये होने का अनुमान है जबकि इस साल के लिए इसके 42,748 करोड़ रुपये होने का अनुमान है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में मंत्रिमंडल की आर्थिक मामलों की समिति सीसीईए ने कहा, ‘यूरिया सब्सिडी योजना जारी रहने से किसानों को सांविधिक रूप से नियंत्रित मूल्य पर पर्याप्त मात्रा में यूरिया की आपूर्ति सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी।’

बयान के अनुसार यूरिया सब्सिडी तीन साल के लिये यानी 2020 तक बढ़ायी गयी है। इस पर 1,64,935 करोड़ रुपये की लागत आने का अनुमान है। सामान्य रूप से उर्वरक मंत्रालय सालाना आधार पर यूरिया सब्सिडी की मंजूरी लेता है, लेकिन इस बार तीन साल के लिये मंजूरी ली गयी है। इसके अलावा सीसीईए ने उर्वरक सब्सिडी वितरण के लिये प्रत्यक्ष लाभ अंतरण( डीबीटी) के क्रियान्वयन को भी मंजूरी दे दी। इसका मकसद सब्सिडी चोरी पर लगाम लगाना है।

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