स्नातक की शिक्षा मुफ्त, लड़कियों पर भारी 11वीं-12वीं की किताबें

केंद्र सरकार ने एक तरफ शिक्षा की पॉलिसी में बदलाव करके प्री नर्सरी से 12वीं तक बच्चों को बेहतर शिक्षा की नीति लागू कर दी है। वहीं छत्तीसगढ़ में लड़कियों को स्नातक तक मुफ्त शिक्षा देने की योजना तो है, लेकिन बच्चियों पर 11वीं-12वीं की किताबें ही भारी पड़ रही हैं। आलम यह है कि 11वीं में सिर्फ किताबें में ही दो हजार रुपए में मिल रही है। ऊपर से कॉपियां और प्रायोगिक सामग्री के अभाव में युवा वैज्ञानिक की सोच रखने वाले विद्यार्थियों के सपने को तगड़ा झटका लग रहा है।

बता दें कि राज्य सरकार ने प्रदेश की बालिकाओं के लिए स्नातक (ग्रेजुएशन) की पढ़ाई में शुल्क माफ कर रखा है। इसकी बदौलत इंजीनियरिंग, मेडिकल क्षेत्रों में पढ़ाई करने वाली लड़कियों के लिए उच्च शिक्षा की पढ़ाई आसान हो रही हैं। वहीं राज्य में 11वीं-12वीं में एनसीइआरटी की किताबें लागू करने के बाद छात्राओं को हायर सेकंडरी की पढ़ाई करना ही मुश्किल हो गया है। राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद(एससीइआरटी) ने पिछले साल से कक्षा 11वीं और 12वीं कक्षा की किताबों में बदलाव कर दिया है।

सभी को आसानी से किताबें मिलें, इसके लिए छत्तीसगढ़ पाठ्यपुस्तक निगम से किताबें भी छपवाई गईं। किताबें सशुल्क होने के कारण स्कूल शिक्षा विभाग इन्हें स्कूली बच्चों तक पहुंचाने में नाकाम रहा। नतीजा यह हुआ कि पाठ्यपुस्तक निगम की किताबों की जगह निजी प्रकाशकों की किताबों को खरीदने की मजबूरी हो गई। निगम की कई विषयों की आधी किताबें भी नहीं बिक पाई। गौरतलब है कि प्रदेश में सभी स्कूली बच्चों को कक्षा पहली से दसवीं की किताबें निःशुल्क बांटी जाती है। सिर्फ कक्षा 11वीं- 12वीं में अभी तक प्रावधान नहीं है।

नहीं बिकी किताबें तो निगम ने छापने से किया इंकार

11वीं-12वीं में पाठ्यपुस्तक निगम की किताबें सस्ती होने के बाद भी नहीं बिक पाईं। घाटे की आशंका से निगम ने इस साल डिमांड मिलने पर ही किताबें छापने का निर्णय लिया ले लिया है। ये स्थिति तब है कि जब पिछले साल निगम ने किताबों को बेचने के लिए दुकानों को कमीशन भी बढ़ाकर दिया था, लेकिन दुकानों को निजी प्रकाशकों से अधिक कमीशन मिलने के कारण निजी प्रकाशकों की महंगी किताबें ही बच्चों को उपलब्ध कराईं। नतीजा यह हुआ कि निगम की कई विषय की किताबें तो पांच प्रतिशत भी नहीं बिक पाईं।

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