ये हुआ था उस दिन गोधरा में, जिसके बाद भड़के गुजरात में दंगे और मारे गये सैकड़ों मुसलमान

गुजरात दंगे को अगर देश का सबसे चर्चित और विवादित दंगा कहा जाय तो गलत नहीं होगा. देश-विदेश की मीडिया हो या फिर किताबें और पत्रिकाएं, गुजरात दंगे की चर्चा आज भी गाहे-बगाहे होती रहती है. यह वह दंगा थे जिसने ना ही मात्र गुजरात की राजनीति बदलकर रख दी थी बल्कि देश की राजनीति पर भी गहरा प्रभाव डाला था. लोगों के दिलों में आज भी एक प्रश्न है आखिर वह क्या कारण था जिसके चलते गुजरात में दंगे भड़के थे.

ये हुआ था उस दिन गोधरा में, जिसके बाद भड़के गुजरात में दंगे और मारे गये सैकड़ों मुसलमान

Third party image reference

आज हम आपको इसी विषय से संबंधित वह जानकारियां दे रहे हैं जिसके चलते गुजरात में दंगे भड़के थे और जिसके पश्चात बड़े पैमाने पर हत्याएं हुयी थीं. मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, 27 फरवरी 2002 को अयोध्या से गुजरात आ रही साबरमती एक्सप्रेस नामक ट्रेन में मुसलमानों की भीड़ ने आग लगा दी थी जिसमें जलकर 59 हिन्दू कारसेवक मारे गये थे.

बताया जाता है, जब ट्रेन में हिन्दू कारसेवकों की जली हुयी लाशें पीड़ित हिन्दुओं के घर पहुंचने लगी और हिन्दू समाज के लोगों ने जब अपनों की लाशें ऐसी हालत में देखीं तो उनमें रोष फ़ैल गया. हिन्दुओं का यही रोष गुजरात दंगे के रूप में सामने आया. जिसके बाद गोधरा और गुजरात के कई हिस्सों में हिन्दुओं ने मुसलमानों को निशाना बनाया.

Third party image reference

इस दंगे में जहाँ बड़े पैमाने पर संपत्ति को नुकसान पहुंचाया गया वहीं इंसानियत भी तार-तार हो गयी. ऐसे-ऐसे घृणित कार्य हुए जो मानव समाज पर कलंक हैं. हालांकि इस दंगे में सिर्फ मुस्लिम मारे गये ऐसा नहीं है बल्कि आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, इस दंगे में 254 हिन्दू मारे गये थे. अगर मुस्लिमों की मौतों के आंकड़ो की बात करें तो 790 मुस्लिम मारे गये थे.

वाजपेयी और मोदी जली ट्रेन देखते हुए Third party image reference

गोधरा कांड मामले की जांच अभी भी चल रही है जिसमें ट्रेन में हिन्दुओं को जिंदा जलाकर मारने के आरोप को लेकर एसआईटी कोर्ट ने पांच में से दो लोगों को दोषी ठहराया है. इसके साथ ही अन्य तीन को बरी कर दिया. मामले में इमरान उर्फ शेरू भटुक और फारूक भाना को आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई है वहीं, हुस्सैन सुलेमान मोहन, फारूक धांतिया और कासम भमेड़ी को बरी कर दिया गया है. ये सभी गोधरा के निवासी हैं जिनमें दोषियों का संबंध ट्रेन जलाने में साबित हुआ.

Third party image reference

दंगे कैसे भी हों वह मानवता के नाम पर एवं किसी भी राष्ट्र के नाम पर कलंक के समान होते हैं. दंगे में दरअसल कोई हिन्दू-मुसलमान नहीं मरता, मरता है तो इंसान. वो इंसान जिसकी कोई गलती नहीं होती और जिसने आशा भी नहीं की होती कि उसके साथ ऐसा कुछ भी हो सकता है. इसलिए कभी भी संप्रदाय के आधार पर किसी भी प्रकार की नफरत से हम सबको बचकर रहना चाहिए. भाईचारा ही वह चीज है जो हमें मजबूत और ताकतवर बनाये रख सकता है.

Facebook Comments