इतनी बार जाप करने से होते हैं बजरंगबली के दर्शन, हनुमान भक्तों के लिए वरदान हैं ये 3 मंत्र

 कलियुग में हनुमानजी (Lord Hanuman) ही ऐसे देवता हैं जो अभी भी पृथ्वी पर विराजमान है। ये सच्चे मन से याद करते ही अपने भक्तों के समस्त कष्ट दूर करते हैं।

इनके दर्शन करने के लिए भी विशेष प्रयास नहीं करना पड़ता। जानिए ऐसे ही मंत्रों के बारे में जिनके द्वारा आप हनुमानजी (Lord Hanuman) का दर्शन कर सदा-सर्वाद के लिए कष्टों से मुक्ति पा सकते हैं.

पूजा विधि

हनुमानजी को प्रसन्न करना सबसे सहज है। इसके लिए आप सुबह जल्दी उठकर नहा-धो लें तथा शुभ मुहूर्त में उनकी पूजा आरंभ करें। सबसे पहले भगवान गणेश, पितृगण, महादेव-पार्वती तथा श्री राम दरबार की पूजा कर बाद में हनुमानजी की पूजा करें। अंत में अपने गुरु का स्मरण कर उनकी आज्ञा से साधना आरंभ करें। इन सभी की पूजा के बाद आप शांत, शुद्ध चित्त होकर एकांत में आसन पर पद्मासन में बैठें तथा रूद्धाक्ष अथवा तुलसी की माला पर मंत्र का जाप आरंभ करें। पहले दिन जितना जप करें, आखिर तक प्रतिदिन उतना ही मंत्र जाप करें, कम या ज्यादा न करें।

पूजा में रखें ये सावधानियां

जितने दिन या समय हनुमानजी की पूजा करें, उतने दिन ब्रह्मचर्य का पालन करें। संभव हो तो स्त्रियों से दूर ही रहें। हनुमानजी की पूजा से पहले भगवान राम की पूजा करना न भूलें, अन्यथा आपका मंत्र जाप और सारी पूजा व्यर्थ हो जाएगी। साधना काल में कभी किसी का बुरा न करें, यथासंभव दूसरों का भला करने का प्रयास करें। साधना के दौरान कभी किसी पशु, निर्बल, स्त्री अथवा अन्य किसी को शारीरिक, मानसिक या अन्य किसी प्रकार की पीड़ा न दें।

पहला हनुमान मंत्र

ॐ ह्रीं यं ह्रीं रामदूताय, रिपुपुरीदाहनाय अक्षकुक्षिविदारणाय, अपरिमित बल पराक्रमाय, रावण गिरि वज्रायुधाय ह्रीं स्वाहा।।

इस मंत्र का प्रयोग गुरुवार के दिन आरंभ करना चाहिए। हनुमानजी की प्रतिमा अथवा चित्र के सामने बैठकर कम से कम दस हजार जप करें। इस मंत्र को सिद्ध करने के बाद आप इस मंत्र के प्रयोग से दूसरों का भला भी कर सकते हैं।

दूसरा हनुमान मंत्र

ॐ यं ह्रीं वायु-पुत्राय ! एहि एहि, आगच्छ आगच्छ, आवेशय आवेशय, रामचन्द्र आज्ञापयति स्वाहा।

इस मंत्र का प्रयोग नवरात्रा में करना चाहिए। हनुमानजी की प्रतिमा अथवा चित्र के सामने बैठकर कम से कम दस हजार जप करें। इस मंत्र को सिद्ध करने के बाद आप इस मंत्र के प्रयोग से दूसरों का भला भी कर सकते हैं।

हनुमान गायत्री मंत्र

ऊँ अंजनी जाय विद्महे वायुपुत्राय धीमहि तन्नो हनुमान प्रचोदयात्।

यह हनुमान गायत्री मंत्र है। इसके सवा लाख जप से साक्षात हनुमानजी के दर्शन होते हैं तथा मनचाही इच्छापूर्ति और मोक्षप्राप्ति का वर मिलता है।

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