दिल पर हाथ रखकर अपने आप से पूछिए ये सवाल….

घुटनों से रेंगते-रेंगते कब पैरों पर खड़ा हुआ, तेरी ममता की छाव में जाने कब मैं बड़ा हुआ.. काला टीका दूध मलाई आज भी सब कुछ वैसा है.. मैं ही मैं हूं हर जगह प्यार ये तेरा कैसा है? सीधा साधा भोला भला मैं ही सबसे अच्छा हूं.. कितना भी हो जाऊ बड़ा मां..

ये महज एक कविता नहीं.. बल्कि जिंदगी की वो सच्चाई है। जिसपर आज सिर्फ धुंध छाई हुई है। दुनिया में कितने ही ऐसे लोग होंगे, जिनके पास सब कुछ है पर मतृ दिवस यानी मदर्स-डे पर मां नहीं है। लेकिन जिनके पास मां है.. वो आज तक उस ‘मां’ की अहमियत ही नहीं समझ पाए हैं। कैसे भूल सकते हैं उस मां को.. जिसने कांटों पर चलकर हमारी दुनिया को फूलों से सजाया। वो दिन याद कीजिए जब यही मां अपने हिस्से का निवाला भी हमें देती थी.. और खुद पानी पीकर ही सो जाती थी। उस मां ने हर वो सपना पूरा किया.. जो हमने बंद आंखों से देखे थे।

दिल पर हाथ रखकर अपने आप से पूछिए ये सवाल

कैसे भूल सकते हैं उन आंसू को जिसे मां ने जमीन पर गिरने नहीं दिया। लेकिन आज के युग में ज्यादातर लोग उसी मां को खून के आंसू रोने को मजबूर कर रहे हैं। इसका ऐहसास खुद हो जाएगा, जब आप खुद से ये सवाल करेंगे। अपने आप से पूछिए कि आपने अपनी मां को आखिरी बार कब खुश रखा। अपनी मां को लेकर आपको चिंता कब हुई। दिल पर हाथ रखकर पूछिए कि तुम्हारी जिंदगी में उसकी क्या अहमियत है। जवाब में सिर्फ खामोशी ही मिलेगी।

अब वो दौर नहीं है जब लोग कहते थे.. कि मेरी मां मेरे लिए जिंदगी है.. मैं अगर आज सांस ले रहा हूं तो उनकी बदौलत ले रहा हूं.. वो मेरे लिए भगवान का दूसरा रूप है। वो दौर बिल्कुल अलग था और ये दौर तो बिल्कुल ही अलग होता जा रहा है। आज के युग में किसी से भी सवाल करो कि आखिरी बार अपनी मां को आपने कब स्पेशल फील कराया…जवाब तो दूर की बात ज्यादातर लोग शर्म के मारे सिर झुका लेंगे.. और कुछ जवाब भी देंगे तो कहेंगे कुछ खास नहीं किया। उन लोगों में मैं खुद हूं। मैं ही नहीं मेरे जैसे कई लोग होंगे जो सिर्फ मदर्स-डे पर ही अपनी मां को खुश रखने के लिए कुछ स्पेशल करते होंगे। कोई उन्हें नई साड़ी गिफ्ट करता होगा.. तो कोई कुछ पैसे खर्च कर उन्हें कहीं खाने पर ले जाता होगा। ये हकीकत भी है। क्योंकि ऐसा ही होता है। और ये सिर्फ मदर्स डे पर ही होता है। क्योंकि उसके बाद तो लोगों के पास समय ही कहां रहता है।

मदर्स डे के मौके पर मैं अपनी मां के साथ हर उस मां को सलाम करता हूं, जिसने अपनी दुनिया मिटा कर हमारी दुनिया को आबाद किया। जो शख्स मां की कद्र नहीं करता, वह इंसानियत के नाम पर एक ऐसा बदनुमा दाग है, जिसको वह सात जन्म तक धो नहीं सकता।

खुशनसीब हैं वो जिनके पास मां है। उनसे पूछिए जो बिन मां के उसकी याद में तड़प-तड़प कर अपनी जिंदगी गुजार रहे हैं। मंदिर में मां की मूर्ति को पूजने से पहले उस मां को पूजिए जो आपके पास है, जिसे आप भूलते जा रहे हैं। उसे आपके पैसे नहीं, बल्कि आपका वह प्यार चाहिए जो प्यार उसने आपको बचपन में ममता के रूप में लुटाया। सिर्फ एक बार घर छोड़ने से पहले उसके पास जाकर उससे इतना जरूर पूछिए, मां तुम कैसी हो, बस यूं समझिए उसे अपनी जिंदगी में सब कुछ मिल गया।

 

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