19 साल बाद 30 दिन का पड़ रहा दुर्लभ संयोग, इस बार पूरे एक महीने गूंजेगा हर-हर महादेव का जयकारा

सावन का महीना करीब 28 या 30 दिन का होता है, लेकिन इस बार बेहद दुर्लभ संयोग बन रहे हैं। 19 साल के बाद इस बार सावन 30 दिन का होगा।

इस बार पूरे 30 दिन हर मंदिर, हर घर हर-हर महादेव के जयकारों से गूंज उठेगी। अब तक कोई तिथि दो दिन पड़ने से सावन का महीना 28 या 29 दिन का होता था, लेकिन इस बार सभी तिथियां अलग-अलग दिन पर पड़ रही हैं। इस बार सावन में करोड़ सूर्यग्रहण के फल के बराबर फलदायी माने जाने वाले भौमवती अमावस्या का संयोग बन रहा है। बाबा को भांग, बेल पत्र और दूध चढ़ाने से मनवांछित फल की प्राप्ति होने की मान्यता के चलते सुरेश्वर महादेवपीठ में विशेष महाभिषेक किया जाएगा।

इस साल उदया तिथि 28 जुलाई को होने से श्रावण का महीना इसी दिन से शुरू होगा। यह अत्यंत दुर्लभ संयोग है। श्रावण मास में भगवान शिव की पूजा दूध, दही, शहद, घी, शक्कर, गन्ना रस, पंचामृत, नारियल के जल से एवं अनेक प्रकार के फलों के रस से अभिषेक करने से इच्छा अनुसार फल की प्राप्ति होगी। पहला सोमवार 30 जुलाई, दूसरा छह अगस्त, तीसरा 13 अगस्त और चौथा 20 अगस्त को पड़ रहा है। चारों सोमवार को महाभिषेक होगा। लंब हो रहा है, उनके लिए सावन के महीने में मंगला गौरी का व्रत रखना शुभ फलदायी होगा।

इसलिए मनाया जाता है सावन-

पूरे देश में सावन के महीने को एक त्योहार की तरह मनाया जाता है और इस परंपरा को लोग सदियों से निभाते चले आ रहे हैं। भगवान शिव की पूजा करने का सबसे उत्तम महीना होता है सावन लेकिन क्या आप जानते हैं कि सावन के महीने का इतना महत्व क्यों है और भगवान शिव को यह महीना क्यों प्रिय है? आइए जानते हैं इसके पीछे की मान्यताओं के बारे में…

भगवान शिव को क्यों प्रिय है सावन का महीना?

कहा जाता हैं सावन भगवान शिव का अति प्रिय महीना होता हैं। इसके पीछे की मान्यता यह हैं कि दक्ष पुत्री माता सती ने अपने जीवन को त्याग कर कई वर्षों तक श्रापित जीवन जीया। उसके बाद उन्होंने हिमालय राज के घर पार्वती के रूप में जन्म लिया। पार्वती ने भगवान शिव को पति रूप में पाने के लिए पूरे सावन महीने में कठोरतप किया जिससे प्रसन्न होकर भगवान शिव ने उनकी मनोकामना पूरी की। अपनी भार्या से पुन: मिलाप के कारण भगवान शिव को श्रावण का यह महीना अत्यंत प्रिय हैं। यही कारण है कि इस महीने कुमारी कन्या अच्छे वर के लिए शिव जी से प्रार्थना करती हैं। मान्यता हैं कि सावन के महीने में भगवान शिव ने धरती पर आकार अपने ससुराल में विचरण किया था जहां अभिषेक कर उनका स्वागत हुआ था इसलिए इस माह में अभिषेक का महत्व बताया गया हैं।

पौराणिक कथाओं के अनुसार
धार्मिक मान्यतानुसार सावन मास में ही समुद्र मंथन हुआ था जिसमे निकले हलाहल विष को भगवान शिव ने ग्रहण किया जिस कारण उन्हें नीलकंठ का नाम मिला और इस प्रकार उन्होंने से सृष्टि को इस विष से बचाया। इसके बाद सभी देवताओं ने उन पर जल डाला था इसी कारण शिव अभिषेक में जल का विशेष स्थान हैं। वर्षा ऋतु के चौमासा में भगवान विष्णु योगनिद्रा में चले जाते हैं और इस वक्त पूरी सृष्टि भगवान शिव के अधीन हो जाती हैं। अत: चौमासा में भगवान शिव को प्रसन्न करने हेतु मनुष्य जाति कई प्रकार के धार्मिक कार्य, दान, उपवास करती हैं।

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