National : देवरिया कांड मामले की सुनवाई 20 अगस्त तक के लिए टली

इलाहाबाद हाई कोर्ट देवरिया आश्रय गृह मामले की सुनवाई 20 अगस्त तक के लिए टाल दी। इस मामले पर सुबह में सुनवाई की गई और इसके बाद इस पर दोपहर 2 बजे सुनवाई करने का निर्णय किया गया क्योंकि अपर महाधिवक्ता मनीष गोयल को लापरवाह पुलिस अधिकारियों के खिलाफ की गई कार्रवाई के बारे में इस पीठ को अवगत कराने का निर्देश दिया गया था।

दोपहर दो बजे गोयल ने पीठ को सूचित किया कि राज्य सरकार इस मामले में बहुत गंभीर है और वह सभी दोषी पुलिस अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई करेगी। बाद में अदालत ने इस मामले की सुनवाई चैंबर में की और सुनवाई की अगली तारीख 20 अगस्त तय की।

उल्लेखनीय है कि मुख्य न्यायाधीश डीबी भोसले और न्यायमूर्ति यशवंत वर्मा ने इस मामले के संबंध में समाचार पत्रों में प्रकाशित रपटों को स्वतः संज्ञान में लिया था। इससे पूर्व आठ अगस्त को सुनवाई के दौरान अदालत ने राज्य सरकार के वकील से यह अवगत कराने को कहा था कि क्या आश्रय गृह में या इसके आस पास कोई सीसीटीवी कैमरे लगे हैं।

साथ ही पीठ ने उन कारों के मालिकों के बारे में भी अवगत कराने को कहा था जिनकी कारों का उपयोग मीडिया रपटों के मुताबिक, नाबालिग लड़कियों को रात्रि में आश्रय गृह से ले जाने के लिए किया जाता था।

राज्य सरकार ने सूचित किया कि उस आश्रय गृह के आसपास लगे सीसीटीवी की जांच की गई लेकिन उसमें कुछ नहीं मिला। एक समय अपर महाधिवक्ता ने पीठ से मीडिया को इस मामले की रिपोर्टिंग नहीं करने का निर्देश देने का अनुरोध किया। हालांकि अदालत ने मीडिया पर रोक का कोई आदेश पारित करने से इनकार किया और स्पष्ट किया कि पीड़ितों की पहचान मीडिया द्वारा उजागर नहीं की जाएगी।

उल्लेखनीय है कि मां विंध्यवासिनी महिला एवं बालिका संरक्षण गृह से 10 वर्ष की एक लड़की भाग गई और उसने आश्रय गृह में चल रही भयावह गतिविधियों के बारे में पुलिस को सूचित किया जिसके बाद गत पांच अगस्त की रात पुलिस ने वहां छापा मारकर 24 महिलाओं को छुड़ाया और पाया कि अन्य 18 लड़कियां लापता थीं। पुलिस ने आश्रय गृह की प्रबंधक गिरिजा त्रिपाठी, उसके पति मोहन त्रिपाठी और उनकी बेटियों कंचन लता त्रिपाठी व कनक लता त्रिपाठी को गिरफ्तार कर लिया है।

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