हरिवंश नारायण : न सड़क न बिजली फिर भी हासिल किया ये मुकाम

राज्‍यसभा उपसभापति का चुनाव जीतने के बाद जदयू नेता हरिवंश नारायण सिंह ने अपनी जिंदगी के बारे में कुछ बातें साझा कीं। हरिवंश ने अपने गांव के बारे में बताते हुए कहा कि मैं उस गांव का हूं जो नदियों को बीच बसा है गंगा और घाघरा। मेरी पढ़ाई प्रमाइमरी स्कूल से हुई है। मेरे गांव में जब बाढ़ आती थी तो लगता था ये हमारी आखिरी रात होगी। उस परिवेश से निकलकर दिल्ली आया, यहां के एलीट क्लास में रहा और अब इस कुर्सी तक पहुंचा। ये सब कभी सोचा नहीं था, ये आप सभी के कारण संभव हुआ।

हरिवंशन ने बताया कि हमारे गांव में आने जाने का रास्ता नहीं था, बिजली नहीं थी। जब बाढ़ आती थी तो सभी अपने-अपने घर में कैद हो जाते थे। जयप्रकाश नारायण का जिक्र करते हुए हरिवंश ने बताया कि एक बार गांव के लोग जयप्रकाश नारायण के पास गए और उनसे कहा, ‘आपका तो नाम इतना बड़ा है, यश है, आप चाहें तो किसी से कहकर यहां बिजली का प्रबंध करा सकते हैं। आप चाहें तो गांव में बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध करा सकते हैं। इस पर जेपी ने जवाब दिया ‘जरूर मुझे बहुत लोग जानते हैं और मैं कह भी सकता हूं लेकिन इस देश में साढ़े पांच लाख गांव भी मेरे हैं, तो मेरे कहन पर सिर्फ मेरे गांव में काम हो तो मैं अपने आप को क्या जवाब दूंगा।

अपने भाषण में हरिवंश ने उन्हें समर्थन देने के लिए सदस्यों का धन्यवाद किया। उन्होंने कहा कि सदन ने उनमें विश्वास जताकर उन्हें जो जिम्मेदारी दी है वह उसका पूरी निष्पक्षता और अपेक्षानुसार निर्वहन करेंगे। उन्होंने कहा कि किसी भी विषय पर सदस्यों में मतभेद हो सकता है लेकिन सभी सदस्य अनुभवी और वरिष्ठ हैं उनसे बात कर बीच का रास्ता निकालकर ही वह सदन को सुचारू ढंग से चलाने का प्रयास करेंगे।

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