UP : यहां तो दर्द ही दर्द दिखता है, न कोई दोस्त न हमदर्द दिखता है

कहीं बांध को टूटने से बचाने की जद्दोजहद है तो कहीं सरयू की तेज धार के बीच गांव से निकलने और लोगों को निकालने की कोशिश। कहीं टापू बन गए घरों पर जमे परिवारों तक खाना पहुंचाने की जद्दोजहद, तो कहीं मवेशियों तक चारा ले जाने की कोशिश, कोई घर छोड़ने को तैयार नहीं तो कोई घर जाने को तैयार नहीं क्योंकि सरयू ने कई बस्तियों को पानी से घेर लिया है ।  क्षेत्र में बाढ़ग्रस्त मजरे तो अलग-अलग हैं लेकिन सबका दर्द एक है, सबकी दास्तान एक है। सैलाब के सितम के बीच सबको हमदर्द की तलाश है।
सोनौली मोहम्मदपुर के अधिकतर मजरे बाढ़ की भीषण विभिषिका झेल रहा है। जिले में सरयू किनारे बसे तमाम गांव, बाढ़ की चपेट में हैं, कहीं सरयू ने पूरे गांव को घेर लिया है। कहीं लोग सरयू के कटाव से बांध को बचाने की जद्दोजहद में लगे हैं ताकि उनका गांव पानी की चपेट में न आ जाए। कई गांव ऐसे मिले जहां लोगों के पास नावें नहीं हैं तो रस्से को पकड़कर तेजधार को पार करने की चुनौती है।
सोनौली मोहम्मदपुर के बच्ची माझा व मदरही माझा ,चैलहन पुरवा , निश्चिंत पुरवा ,दृगपाल पुरवा सरयू के किनारे बांध से सटा है जहां पानी पूरे गांव को अपनी चपेट में ले चुका है। नदी की धार इतनी तेज है कि अगर पांव फिसला तो फिर मौत तय है, अधिकांश लोगों के पास नावों की सुविधा नहीं है कि लोग गांव आ-जा सके। ऐसे में गांववालों ने मिलकर नायाब रास्ता निकाला ताकि लोग गांव से सुरक्षित निकल सके। पूरे गांव के रास्ते मे बने पेड़ों में लोगों ने मोटे-मोटे रस्से बांध दिए हैं रस्से को पकड़कर नदी की धार को मात दी जा रही है। गांव के प्रधान राजू सिंह कहते हैं कि सरकार की तरफ से अभी तक 15 नावों का प्रबंध किया है। जिसे चैलहन पुरवा, गोड़इतन पुरवा, चौधरी पुरवा में दे दिया गया है। जबकि अभी तक कई मजरे ऐसे हैं जिन्हें नावों की सख्त जरूरत है। दृगपाल पुरवा के राम जी कहते हैं कि हमारे क्षेत्र में लगभग सैकड़ों हेक्टेयर गन्ना व मक्का बर्बाद हो चुका है। यहां का प्राथमिक स्कूल चारों तरफ से पानी से घिरा हुआ हैं।

मदरही पर छाया संकट: लगभग 15 सौ की आबादी वाला मदरही की स्थिति धीरे-धीरे बिगड़ती जा रही हैं।यहां पर महिलाओं और बच्चों को चौतरफा संकट का सामना करना पड़ रहा है। इसी गांव की उर्मिला ,श्यामा, रेनू, सलमा ,मुन्नी बताती हैं कि उन्हें जानवरों का चारा लाने के लिए कमर तक पानी में घुसकर जाना पड़ता है। रोजमर्रा की आवश्यक जरूरतों के लिए उन्हें भारी दिक्कत का सामना करना पड़ रहा है। मंसाराम, संतोष कुमार, नंद , बबलू आदि का कहना है कि अभी तक यहां पर कोई भी सरकारी मदद नहीं पहुंचाई गई और न ही आज तक कोई भी कर्मचारी यहां हाल खबर लेने आया है। बाढ़ की तेज धार घरों को खोखला भी कर रही है। बाढ़ग्रस्त इलाके के सभी नल बाढ़ में डूब गए हैं और लोगों को खाना तो दूर शुद्ध पानी तक नहीं मिल पा रहा है।

कई जगह घाव दे रही सरयू: ऐली परसौली में उफनाई सरयू की लहरे लगातार  घोड़हन पुरवा को काट रही हैं। यहां पर भी सरयू भिखारीपुर सकरौर तटबंध से सट कर बह रही है। पूरे इलाके में तमाम मजरों के हालात कमोबेश एक ही है और तमाम सरकारी दावे महज खोखले साबित हो रहे हैं।

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