साइकिल के इतिहास में कई लोगों का योगदान रहा….

साइकिल के इतिहास में कई लोगों का योगदान रहा है। साइकिल के असली निर्माता के बारे में भले ही किसी को न पता हो, लेकिन इससे जुड़ी कुछ धारणाएं जरूर हैं। माना जाता है कि पहिये से एक वाहन बनाने की शुरुआत सन 1418 में की गई थी। जिओवानी फोंटाना नामक एक इटली के इंजीनियर को सबसे पहली साइकिल का निर्माता माना जाता है। साइकिल के प्रचलन में आने से कई सालों पहले ही इसकी खोज शुरू हो गई थी।

कहा ये भी जाता है कि शुरुआत से साइकिल दो पहिये नहीं, बल्कि चार पहिये की हुआ करती थी। इसे ऐसा इसलिए बनाया गया था ताकि इसे चलाने में कोई परेशानी ना हो। जिओवानी फोंटाना ने चार पहिया वाहन जैसा ही कुछ बना दिया था, लेकिन 400 सालों तक किसी ने उस खोज पर कोई खास ध्यान नहीं दिया था।

400 साल बाद 1813 में एक जर्मन इन्वेंटर ने साइकिल बनाने का जिम्मा अपने ऊपर लिया। उसने साइकिल बनाने का काम शुरू किया। कार्ल नामक उस व्यक्ति ने भी जिओवानी जैसी ही एक चार पहिया वाहन बनाया था, लेकिन वो थोड़ा बेहतर था। 1817 में ड्रेस ने चार पहिया साइकिल को बदल कर उसे दो पहिये में तब्दील किया। ड्रेस का वह आविष्कार काफी लोकप्रिय हुआ। यूरोप में लोग उसे ‘हॉबी हॉर्स’ के नाम से जाना करते थे। ड्रेस ने साइकिल का निर्माण तो कर दिया था पर उनकी साइकिल में अभी भी बहुत सी कमियां थी। सबसे बड़ी बात तो यह थी कि उनकी बनाई साइकिल को सभी को अपने पैरों से धकेलना पड़ता था। इस मेहनत को खत्म करने के लिए ही पेडल का आविष्कार हुआ। पेडल बनाने का श्रेय स्कॉटलैंड के एक लोहार ‘मैकमिलन’ को दिया जाता है। कहते हैं कि 1839 में मैकमिलन ने कुछ लोगों को साइकिल को चलाते हुए देखा था। उसने गौर किया कि लोग उन साइकिलों को अपने पैरों से धक्का मार रहे थे। इसलिए उन्होंने अपने इस हुनर का इस्तेमाल करते हुए कुछ बनाने की सोची। उन्होंने कुछ ही वक़्त में पेडल तैयार कर ही दिया। उन्होंने जैसे ही साइकिल में इसे लगाया साइकिल का पूरा हिसाब ही बदल गया।

उनकी बनाई साइकिल लकड़ी के फ्रेम की थी, लेकिन पहियों में मजबूती के लिए लोहे का प्रयोग किया गया था। साइकिल को सब चला सकें इसलिए उन्होंने उसमें स्टीयरिंग भी लगाया। उन्होंने बहुत सी चीजें लगा दी थी इसलिए इसकी वजह से साइकिल का वजन काफी बढ़ गया था। माना जाता है कि मैकमिलन की साइकिल का वजन करीब 26 किलो था। 1870 में आई साइकिल अब पूरी तरह से धातु के फ्रेम वाली हो गई। इसके साथ ही इसमें रबर के टायर का इस्तेमाल भी होना शुरू हो गया। रबड़ के प्रयोग से साइकिल की सवारी और भी बेहतर हो गई थी। 1870 से 1880 तक इस तरह की साइकिलों को पैनी फार्थिंग कहा जाता था जिसको अमेरिका में बहुत लोकप्रियता मिली। इसने बहुत से लोगों का ध्यान अपनी ओर खींचा क्योंकि इसका पहला पहिया बहुत बड़ा और इसका पिछला पहिया काफी छोटा था।

माना जाता है कि पैनी फार्थिंग साइकिल सुरक्षित नहीं हुआ करती थी, इनमें दुर्घटना का ज्यादा खतरा होता था। किसी को समझ नहीं आ रहा था कि कैसे एक सुरक्षित साइकिल को बनाया जाए। 1880 में इस काम को ‘जे के स्टारले’ द्वारा अंजाम दिया गया जब उन्होंने ‘रोवर साइकिल’ का निर्माण किया। कहते हैं कि यह पहली बार था जब किसी साइकिल को मौज नहीं बल्कि सुरक्षा के लहजे से भी बनाया गया हो।

इसकी खासियत थी कि पहले की साइकिलों की तरह इसमें पेडल आगे के टायर नहीं बल्कि पीछे के टायर से जुड़े होते थे। 1920 के दशक में बच्चों के लिए साइकिलों को बनाना शुरू कर दिया गया। 1960 के दशक में साइकिलें इतनी लोकप्रिय हो गई कि इनका प्रयोग रेसिंग में भी किया जाने लगा। फिर समय के साथ-साथ साइकिलों में कई बदलाव किये गए… और वो बदलाव आज के समय तक जारी हैं।

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