Inside Story : प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना में किसानों के साथ हो रहा है धोखा

प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना में बैंक व कम्पनियां मिलकर मोटा मुनाफा कमाने में जुटी है।  एक तरफ सरकार किसानों के हित की बातकर रही है तो वहीं दूसरी ओर बैंक व कम्पनिया गठजोड़ कर प्रदेश के अन्नदाता की गाढ़ी कमाई से चांदी कूट रही है। बारां जिले में फसल बीमा योजना में ऐसा ही गड़बड़झाला सामने आया है।

फसल बर्बादी के बाद किसान क्रेडिट कार्ड से कटे प्रीमियम का बीमा क्लेम लेने , किसान इंश्योरेंस कंपनी के पास जा रहे है तो उन्हें बीमा कंपनी कुछ राशि ही प्रीमियम के रूप में जमा होना बता रही है। इस कारण अन्नदाता ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं। बैंक और इंश्योरेंश कम्पनी के बीच चक्कर काट रहा किसान, बड़े घोटाले की आशंका जता रहे है और उच्च स्तरीय जाच की मांग कर रहे है।

दरअसल, यह है मामला बारां जिले के सहरोद नरसिंहपुरा निवासी भागीरथ शर्मा ने करीब 28 बीघा जमीन पर स्टेट बैंक ऑफ इंडिया की बारां शाखा में किसान क्रेडिट कार्ड बनाया हुआ है। जिस पर बैंक ने 9 अगस्त 2017 को 4.51 हेक्टर क्षेत्रफल के लिए 2301 रुपए खरीफ फसल बीमा प्रीमियम राशि के काटे।

इन्होंने अपनी जमीन पर (सोयाबीन व उड़द )खरीफ फसल की। लेकिन प्राकृतिक आपदा (बारिश) के कारण उनकी जमीन पर पूरी फसल खराब हो गई।  एग्रीकल्चर डिपार्टमेंट ने उनकी पूरी फसल खराब बता कर बीमा कंपनी को क्लेम राशि देने के लिए पत्र भेज दिया। जब भागीरथ ने इंश्योरेंश कम्पनी से क्लेम के लिए पत्र व्यवहार किया तो एग्रीकल्चर इंश्योरेंस कंपनी ऑफ इंडिया लिमिटेड ने भागीरथ नाम के व्यक्ति की जमीन के कुछ हिस्से(0.4 हेक्टर)को ही बीमित बताया और कहां की उन्हें केवल 216 रूपय ही प्रीमियम मिला है।

बता दें कि यही पीड़ा किसान हरिबल्लभ की भी है। बीमा कम्पनी उनकी जमीन के केवल 0.8 हेक्टर की बीमित बता रही है जबकि उनका 28 बीघा जमीन पर स्टेट बैंक ऑफ इंडिया की बारां शाखा में किसान क्रेडिट कार्ड बनाया हुआ है। जिस पर बैंक करीब 4 हेक्टर क्षेत्रफल के लिए बीमा प्रीमियम राशि के काटी है। उन्होंने भी अपनी जमीन पर (सोयाबीन व उड़द )खरीफ फसल की है। 100 प्रतिशत फसल नुकसान की रिपोर्ट एग्रीकल्चर डिपार्टमेंट द्वारा देने के बाद भी धरतीपुत्र को प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना का लाभ नहीं मिल पा रहा है। बीमा योजना में घोटाले की आशंका जता पीड़ित किसानों ने पीएमओ में इसकी शिकायत की।

लेकिन जिम्मेदार अधिकारियों ने इस मामले में पीएमओ को भी गुमराह कर गलत जानकारी दी।

vo 3 ऐसा केवल भागीरथ व हरिबल्लभ के साथ ही नहीं हुआ। इन जैसे अन्य किसान भी है जिनके खाते से प्रीमियम तो पूरा काटा गया लेकिन राज्य सरकार की बीमा कंपनी तक नहीं पहुंचा। किस्मत के मारे धरती पुत्र पिछले तीन महीनों से क्लेम के लिए बैंक व इंश्योरेंश कम्पनी के चक्कर काट रहे है।
ये तो बानगी है जिले में ऐसे कई धरतीपुत्र है,जो सिस्टम के फेर में बैंक और बीमा कम्पनी की मिलीभगत से ठगी के शिकार हुए है।

अब फसल खराबे के बाद क्लेम के लिए इधर से उधर चक्कर काट रहै है।

सन्तोष बाई  बैंक ने प्रीमियम काटा  765 रु
इंश्योरेंस कंपनी में पहुचा केवल  384.82 रु

नरेश कुमार  बैंक ने प्रीमियम काटा  1240 रु
इंश्योरेंस कंपनी में पहुचा केवल  596.20रु

दुर्गालाल    बैंक ने प्रीमियम काटा 1240  रु
इंश्योरेंस कंपनी में रिकॉर्ड ही नही मिला
। हरिशंकर नायक  बैंक ने प्रीमियम काटा 1730  रु
इंश्योरेंस कंपनी में रिकॉर्ड ही नही मिला

कस्तूर चंद   बैंक ने प्रीमियम काटा 777  रु
इंश्योरेंस कंपनी में रिकॉर्ड ही नही मिला

दीनदयाल   बैंक ने प्रीमियम काटा 903  रु
इंश्योरेंस कंपनी में पहुच 650.40 रु

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