रितक कोली बस नाम याद रखना, मां के दर्द के आगे अदालत को भी झुकना पड़ा

एक 16 साल के विक्लांग लड़के रितिक कोली के लिए वो पल बहुत ही खुशी भरा था जब कई समय बाद उसे नकली हाथ मिले और वो फिर से पहले जैसा महसूस कर सकें। ये सब तभी मुमकिन हो पाया जब दिल्ली हाई कोर्ट ने सरकार को रितिक के लिए नकली हाथ देने का फैसला दिया।

 

रितिक जन्म से ही एक बिमारी से पीड़ित है जिससे उसके शरीर के कई हिस्से विकसित नहीं हो रहे हैं। 12 क्लास में पढ़ने वाला रितीक कलर्स और पेंटिग करने का बहुत शौकिन हैं। पेंटिग का शौक रखने वाला रितीक अब अपने नए हाथों से अपनी ये शौक पूरा कर सकेगा। रितीक की मां रामवती अपने बेटे की ये हालत देख नहीं पा रही थी और चाहती थी उनका बेटा किसी भी तरह सही हो जाए। c
रमावती ने पिछले साल ही अदालत से मदद मांगी थी। एक साल बाद अदालत ने सरकार को रितिक और उसकी मां को मदद देने का फैसला किया और रितीक को नकली हाथ लगवाए जिससे वो अपनी आगे की जिंदगी एक बेहतर तरीके से जी सके।
रमावती जो लोगों के कपड़े सिलने का काम करती हैं। उनका कहना है कि  वो अपनी बेटे के लिए बहुत खुश हैं, उनकी इतनी सालों की मेहनत बर्बाद नहीं हुई और अब वो एक अच्छी जिंदगी जी सकता है। अपने बेटे के बारे में उन्होनें कहा है कि वो एक बहुत ही समझदार और इंटेलिजेंट हैं। उन्होनें कभी भी रितिक को लिखना या पेंटिंग करना नहीं सिखाया लेकिन उसे पेंटिंग करना बहुत ही ज्यादा पसंद है। अब अपने हाथों से वे अपना हर एक सपना पूरा कर पाएगा।
रितिक के पिता एक छोटी सी मिठाई की दुकान चलाते हैं। साल 2016 में जब वो अपने बेटे के लिए मदद मांगने के लिए दिल्ली हाई कोर्ट पंहुचे थे तभी उन्हें अशोक नाम के वकील मिले थे जिनकी मदद से ये अच्छे दिन उनकी जिंदगी में आया।
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