देश से दवाओं का निर्यात वर्ष 2020 तक 20 अरब डॉलर को पार कर जाएगा….

इस बारे में उदय भास्कर ने बताया कि भारत से दवाएं खरीदने में चीन सहित पड़ोसी देशों की दिलचस्पी बढ़ने से फार्मा निर्यात में भारत का प्रदर्शन अच्छा बना रहेगा.बता दें कि चीन से भारत बड़े पैमाने पर दवाएं बनाने के लिए एक्टिव फार्मास्यूटिकल इंग्रीडिएंट (ए.पी.आई.) की खरीदी करता है.वित्त वर्ष 2017-18 में भारत से दवाओं का निर्यात 2.91 प्रतिशत बढ़कर 17.27 अरब डॉलर पहुंच गया जो 2016-17 में 16.78 अरब डॉलर था.

उल्लेखनीय है कि इस हफ्ते इंटरनेशनल एग्जीबिशन ऑफ फार्मा एंड हैल्थ केयर (आई.पी.एच.ई.एक्स.)  से पहले फार्मएग्जिल के डायररेक्टर जनरल रवि उदय भास्कर ने यह जानकारी दी कि अभी चीन दुनिया में ए.पी.आई. की बड़े पैमाने पर आपूर्ति करने के अलावा भारत से ए.पी.आई. का आयात करने में भी दिलचस्पी ले रहा है. भारत से चीन को दवाओं का निर्यात वित्त वर्ष 2017-18 में 44 प्रतिशत बढ़कर 18.26 करोड़ डॉलर हो गया जो साल भर पहले 12.67 करोड़ डॉलर था.अमरीका और रूस जैसे देशों से दवाओं की काफी मांग होने से वित्त वर्ष 2018-19 में भारतीय दवा कम्पनियों का व्यवसाय बेहतर रहेगा.

फार्मा एक्सपोर्ट प्रोमोशन काऊंसिल (फार्मएग्जिल) के डायरेक्टर जनरल रवि उदय भास्कर की बातों पर यकीन करें तो देश से दवाओं का निर्यात वर्ष 2020 तक 20 अरब डॉलर को पार कर जाएगा. अमरीका जैसे देशों को निर्यात घटने पर भी भारत को इस लक्ष्य तक पहुंचने में कोई परेशानी नहीं होगी.

 

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