10 साल पहले पूरे भारत में चलता था इन कंपनियों का सिक्का….

आज हम आपको भारत की कुछ ऐसी कंपनियों के बारे में बताएंगे, जिनकी लगभग 10 साल पहले तक भारतीय मार्केट में अच्छी खासी पकड़ थी, लेकिन इनमें से कुछ आज या दीवालिया हो चुकी हैं, या फिर दूसरी कंपनियों के हाथों बिकने पर मजबूर हो गई हैं।

आरकॉम: धीरूभाई अंबानी ने जिस कंपनी की शुरुआत की थी, वो आज खुद बंद होने की कगार पर पहुंच चुकी है। भारत के सबसे अमीर शख्स मुकेश अंबानी के छोटे भाई अनिल अंबानी की ये कंपनी वक्त के साथ नहीं बदल पाई और लगातार घाटे में रही। कभी देश की दूसरी सबसे बड़ी टेलीकॉम कंपनी रह चुकी आरकॉम को टक्कर एयरटेल, वोडाफोन और आइडिया पहले से ही दे रहे थे। लेकिन बड़े भाई मुकेश अंबानी की कंपनी जियो ने अनिल की कंपनी का भट्टा ही बिठा दिया। जैसे-तैसे अनिल अंबानी ने जियो की एंट्री के बाद भी कंपनी को सालभर तक चलाया लेकिन कर्ज इतना बढ़ गया था कि उन्हें कंपनी का बिजनेस बेचने को मजबूर होना पड़ा। 2017 के आखिर तक आरकॉम बंद हो गई।

एयरसेल: टेलीकॉम इंडस्ट्री में वक्त के साथ न बदल पाने का नतीजा इस दिग्गज कंपनी को भी भुगतना पड़ा। एक समय था जब सबसे सस्ती दरों पर कॉल ऑफर करके एयरसेल ने पूरी टेलीकॉम इंडस्ट्री को हिला कर रख दिया था। लेकिन, जियो की आंधी में इस कंपनी का दीवाला पिट गया। एयरसेल ने भी पिछले साल अपना पूरा बिजनेस समेट लिया और नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल में दिवालिया होने की अर्जी दे दी। जियो की वजह से कंपनी पर हजारों करोड़ का कर्ज चढ़ गया जिसकी वजह से वो कभी उभर ही नहीं पाई।

भूषण स्टील: 90 के दशक में शुरू हुई भूषण स्टील एक समय में भारत की टॉप स्टील निर्माता कंपनियों में शामिल थी। मारुति सुजुकी, महिंद्रा और टाटा मोटर्स जैसी कंपनियां इसी कंपनी से स्टील खरीदती थी। कंपनी का रुतबा ऐसा था कि कोई भी बैंक हाथों-हाथ अरबों का कर्ज देने को तैयार हो जाता था। लेकिन हालात ऐसे पलटे कि भूषण स्टील का पूरा बिजनेस पटरी से उतर गया और उसपर लगभग 56 हजार करोड़ रुपए का कर्ज हो गया। भारी कर्ज होने की वजह से भूषण स्टील अब टाटा स्टील के हाथों बिकने जा रहा है।

सत्यम कंप्यूटर: 1987 में बी रामालिंगा राजू और डीवीएस राजू द्वारा शुरू की गई सत्यम कंप्यूटर सर्विस 1990 के बाद से देश की टॉप 4 आईटी कंपनियों में शामिल थी। 66 देशों में फैला कारोबार और 200 से ज्यादा कंपनियां सत्यम की क्लाइंट थी। दिसंबर 2008 तक सत्यम का कारोबार एकदम बढ़िया चल रहा था। जनवरी 2009 में कंपनी के चेयरमैन बी. रामालिंगा राजू के एक बयान ने कंपनी की लुटिया डुबो दी। दरअसल, उन्होंने कबूल किया कि कंपनी ने अपने अकाउंट्स में मुनाफा बढ़ा-चढ़ाकर दिखाया और देनदारियों को छुपाया। बस यहीं से कंपनी के बुरे दिन शुरू हो गए। घोटाला सामने आने के बाद शेयर बाजार में कंपनी के सारे शेयर डूब गए। दिसंबर 2008 तक जिस शेयर का भाव 544 रुपए था वो जनवरी 2009 में गिरकर मात्र 11 रुपए रह गया। आखिरकार कंपनी महिंद्रा ग्रुप के हाथों बिकने को मजबूर हो गई।

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