जब बैलगाड़ी से संसद पहुंचे थे वाजपेयी, इंदिरा को दी थी चुनौती

16 अगस्‍त को पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने आख‍िरी सांसे ली. राजधानी दिल्ली के अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS) में भर्ती पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी (Atal Bihari Vajpayee) की तबीयत कई दिनों से नाजुक बनी हुई थी. हालांकि काफी कोश‍िश के बाद भी पूर्व पीएम अटल बिहारी वाजपेयी को डॉक्‍टर उबारने में सफल नहीं हो पाए और अब उनके मौत की घोषणा कर दी गई है.
आपको बता दें कि सिर्फ प्रधानमंत्री रहने के दौरान नहीं कई बार विपक्ष में रहते हुए भी अटल बिहारी वाजपेयी ने ऐसा काम किया, जिसकी वजह से विपक्ष के लीडर के तौर पर भी उनको काफी सम्‍मान मिला.

जब बैलगाड़ी से संसद पहुंचे थे वाजपेयी, इंदिरा को दी थी चुनौती

पेट्रोल, डीज़ल के दामों में बढ़ोतरी के दाम को लेकर वर्तमान में बीजेपी सरकार कई महीनों से आलोचना झेल रही हो, लेकिन इसी मुद्दे पर पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने 45 साल पहले ऐसा विरोध किया था जिसे आजतक याद किया जाता है.

45 साल पहले पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने इसी मुद्दे पर इंदिरा गांधी की सरकार के ख़िलाफ़ हल्ला बोला था.

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वाजपेयी पेट्रोल की कीमतों में हुई बढ़ोतरी के खिलाफ प्रदर्शन में बैलगाड़ी से संसद पहुंचे थे और अपना विरोध दर्ज किया था.

न्यूयॉर्क टाइम्स के 12 नंवबर, 1973 को प्रकाशित अंक के मुताबिक तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी को संसद में विरोधी दलों के गुस्से का सामना करना पड़ा था.

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बीबीसी की रिपोर्ट के अनुसार इस दिन संसद में छह सप्ताह तक चलने वाले शीतकालीन सत्र की शुरुआत हुई थी.

पेट्रोल, डीज़ल के दामों में बढ़ोतरी को लेकर उस समय लेफ्ट और बाकी विपक्षी दलों ने इंदिरा से इस्‍तीफे की मांग की थी.

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जन संघ के नेता अटल बिहारी वाजपेयी और दो अन्य सदस्य बैलगाड़ी से संसद पहुंचे थे. इनके अलावा कई अन्य साइकिल से संसद आए थे.

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अटल और बाकी विपक्षी नेता देश में पेट्रोल और डीजल की कमी में इंदिरा गांधी का बग्घी(घोड़ा गाड़ी) से यात्रा करने का विरोध कर रहे थे. इंदिरा गांधी इन दिनों लोगों के बीच पेट्रोल बचाने का संदेश देने के लिए बग्घी से यात्रा कर रही थीं.

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तेल संकट के दौरान तेल बेचने वाले मध्य-पूर्व देशों ने भारत को कच्‍चा तेल भेजना कम कर दिया था, इस वजह से इंदिरा गांधी की सरकार ने तेल की कीमतों में 80 फीसदी से अधिक की बढ़ोतरी कर दी थी. इस वजह से वह अटल समेत दूसरे नेताअों के निशाने पर आ गई थीं.

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आपको बता दें कि गुरुवार सुबह वाजपेयी की तबीयत पर नया मेडिकल बुलेटिन जारी किया गया था. उस बुलेटिन में कहा गया था कि वाजपेयी की तबीयत अभी भी बेहद नाजुक बनी हुई है. हालांकि बाद में शाम को उनकी मौत होने की घोषणा कर दी गई.

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बता दें कि अटल बिहारी वाजपेयी डिमेंशिया नाम की गंभीर बीमारी से जूझ रहे थे और 2009 से ही व्हीलचेयर पर थे. कुछ समय पहले भारत सरकार ने उन्हें भारत रत्न से सम्मानित किया गया.

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किडनी में संक्रमण, छाती में संकुलन और पेशाब कम होने के चलते 93 वर्षीय पूर्व प्रधानमंत्री और बीजेपी के वरिष्ठ नेता वाजपेयी को बीते 11 जून को अस्पताल में भर्ती कराया गया था.

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आपको बता दें कि अटल बिहारी वाजपेयी को प्रखर वक्ता माना जाता था. उनकी वाक पटुता की वजह से उनके धुर विरोधी नेता भी उनकी तारीफ किए बिना नहीं रह पाते थे. उनके कई ऐसे भाषण हैं, जिन्हें आज भी लोग सुनना पसंद करते हैं.

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अटल बिहारी वायपेयी 1991, 1996, 1998, 1999 और 2004 में लखनऊ से लोकसभा सदस्य चुने गए थे. वो बतौर प्रधानमंत्री अपना कार्यकाल पूर्ण करने वाले पहले गैर-कांग्रेसी नेता थे. 25 दिसंबर, 1924  में जन्मे वाजपेयी ने भारत छोड़ो आंदोलन के जरिए 1942 में भारतीय राजनीति में कदम रखा था.

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