बॉलीवुड ने जिसे कुछ नहीं समझा एक समय उसने पूरी इंडस्ट्री चलाई थी, क्या आपने पहचाना इन्हें

आपको फिल्म ‘करण-अर्जुन’ तो याद होगी ही | इस फिल्म में सलमान-खान और शाहरुख़ खान ने काम किया था | वैसे तो इस फिल्म के सारे ही किरदार आज भी प्रसिद्द हैं लेकिन एक किरदार जो शायद कोई भी नहीं भूल सकता वो है ‘मुंशी जी’ | इस किरदार का एक डायलॉग था ‘ठाकुर तो गियो’ | आज भी ये डायलॉग आप अक्सर सोशल मीडिया पर आने वाले मीम्स में देख सकते हैं | खैर हम बात कर रहे हैं इस डायलॉग को बोलने वाले एक्टर अशोक सराफ की | अशोक सराफ को इस एक आर्टिकल में लिख पाना तो आसान नहीं है लेकिन हम उनके बारे में कुछ ख़ास बातें आपको बताएँगे |

अशोक सराफ के पिता चाहते थे कि वो पढ़ाई करे और नौकरी करे लेकिन इस शख्स को तो अभिनय करना था खैर पिता की बात मानते हुए उन्होंने पढ़ाई भी की और नौकरी भी वो भी 10 साल तक | बैंक में नौकरी करते हुए अशोक ने थिएटर करना भी जारी रखा और इसी मंच ने उन्हें उनकी पहली फिल्म दिलवाई जिसका नाम था ‘जानकी’ | हालांकि इस फिल्म ने उन्हें कुछ ख़ास नहीं दिया लेकिन एक पहचान दे दी | करीब 4 साल बाद उन्हें फिर से मौका मिला और फिर तो वो कभी रुके ही नहीं | मराठी फिल्मों में तो उनका सिक्का चलता था | जिस फिल्म में अशोक होते वो फिल्म हिट हो जाती | उनकी कॉमेडी और एक्टिंग थी ही ऐसी | आज के फूहड़ हास्य से परे उन्होंने साफ़ और दिल को खुश कर देने वाली कॉमेडी की थी | करीब 25 साल तक उन्होंने मराठी फिल्म इंडस्ट्री को अपने दम पर चलाया था | यहीं वजह थी कि आज भी उन्हें मराठी फिल्मों का ‘मामा’ कहा जाता है |

अशोक की जोड़ी एक शख्स के साथ सबसे ज्यादा पसंद की गई और वो थे लक्ष्मीकान्त बिरदी | इन दोनों ने एक साथ कई फ़िल्में की और सारी फ़िल्में हिट रहीं | ये सिलसिला तब तक चला जब तक लक्ष्मीकान्त की जिंदगी रही | साल 2004 में लक्ष्मीकान्त का देहांत हो गया और ये जोड़ी टूट गई |

खैर मराठी फिल्मों से अलग अशोक ने बॉलीवुड फिल्मों में भी काम किया लेकिन ना जाने क्यों बॉलीवुड ने उन्हें कमतर ही माना | बॉलीवुड में उन्हें छोटे-छोटे किरदार मिले लेकिन उनमे भी अशोक ने अपनी जान फूंक दी | उनके हवलदार वाले किरदारों की तो बॉलीवुड में भरमार है लेकिन शायद बॉलीवुड उन्हें कुछ और दे सकता था | वो जगह जो उन्हें बॉलीवुड में मिलनी चाहिए थी वो शायद बॉलीवुड उन्हें दे ही नहीं पाया |

अशोक ने धारावाहिक ‘हम पांच’ जैसे दमदार टेलीविज़न शोज में भी काम किया और आज भी उनका 5 बेटियों वाले पिता का किरदार मशहूर है | अशोक ने अपने हर किरदार में खुद को एक बेहतरीन कलाकार साबित किया है भले ही वो 1 मिनट का किरदार ही क्यों ना हो | एक असली कलाकार की यहीं तो पहचान होती है | ऐसे कलाकार अब बिरले ही मिलते हैं | अशोक सराफ का सफ़र आज भी जारी है और उम्मीद है वो हमेशा इस सफ़र में हमें हंसाते रहेंगे |

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