नेत्रहीन लोगो के लिए खुशखबरी, चश्मा जिसे पहन नेत्रहीन पढ़ सकेंगे अखबार……

शायद आप और हम ये बात देख कर भी नहीं देख पाए, लेकिन भारत के चार लड़कों ने नेत्रहीनों की परेशानी को न सिर्फ देखा, बल्कि उनके लिए खास चश्मा भी तैयार कर दिया है। इस चश्मे की मदद से नेत्रहीनों की जिंदगी रंगों से भर जाएगी। इस चश्मो को पहनने के बाद नेत्रहीन न सिर्फ रास्ते में आने वाले मल्टीपल ऑब्जेक्ट्स को पहचान सकेंगे, बल्कि अखबार भी पढ़ सकेंगे।

आधुनिक तकनीक से लैस इस चश्मे में आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल किया गया है। चश्मे को श्रेयस उपासने, अर्पित, संचित और राहुल नाम के चार युवाओं ने बनाया है। इस चश्मे का नाम विश्रुति रखा गया है। श्रेयस उपासने बताते हैं, ‘ विश्रुति संस्कृत शब्द है। इसका मतलब है- सुनकर देखना।’ वो कहते हैं, ‘नेत्रहीन लोगों की पूरी दिनचर्या सुनने से ही चलती है। वो अगर किसी व्यक्ति से दूसरी बार मिलते हैं तो उसे आवाज से पहचान लेते हैं। इस चश्मे को इस तरह से तैयार किया गया है कि ये नेत्रहीन लोगों के जीवन को न सिर्फ सुगम बनाएगा बल्कि इसे पहनकर वो एक अलग तरह की अनुभूति से भर उठेंगे।’

श्रेयस कहते हैं, विश्रुति में कैमरे के साथ ही एक छोटा कंप्यूटर लगा हुआ है। चश्मे में एक ऑडियो फीडबैक सिस्टम लगाया गया है। यह ऑडियो फीडबैक सिस्टम बोन कंडक्शन टेक्नोलॉजी पर काम करता है। इससे कान के पीछे की हड्डी के जरिए साउंड सीधे कान के पर्दे तक पहुंचता है। श्रेयस बताते हैं कि विश्रुति चार फंक्शन के जरिए काम करता है। ये फंक्शन नेविगेशन, मल्टीपल ऑब्जेक्ट्स, करेंसी डिटेक्शन और टेक्स्ट टू स्पीच हैं। वो कहते हैं, नेविगेशन नेत्रहीन लोगों को बताएगा कि उन्हें सीधे चलना है या फिर दाएं-बाएं मुड़ना है। रास्ते में अगर कोई गड्ढा है तो नेविगेशन के जरिए उन्हें इसका पता चल जाएगा। यह सब उन्हें चश्मे में लगे ऑडियो फीडबैक सिस्टम से निकलने वाले साउंड के जरिए पता चलेगा।

 

श्रेयस बताते हैं कि मल्टीपल ऑब्जेक्ट्स से नेत्रहीन लोगों को पता चलेगा कि सामने कौन-सा ऑब्जेक्ट है। इस फीचर के जरिए वो रास्ते में आने वाले किसी भी जानवर को पहचान लेंगे। करेंसी डिटेक्शन फीचर के जरिए नेत्रहीन लोग इंडियन करेंसी की पहचान कर सकेंगे। इसके टेक्स्ट टू स्पीच फीचर के जरिए नेत्रहीन अखबार पढ़ सकते हैं। जैसे ही नेत्रहीन चश्मे के सामने अखबार लाएंगे विश्रुति उनके कानों में हैडलाइन पढ़कर सुना देगा। नेत्रहीन इसके जरिए हिंदी, तमिल,मराठी, कन्नड़ और इंग्लिश सहित करीब 15 भारतीय भाषाओं के अखबारों की हैडलाइन पढ़ सकेंगे। इसके अलावा, वो फ्रेंच और इटैलियन लैंग्वेज भी पढ़ सकेंगे। वो कहते हैं, विश्रुति में लगे चारों फंक्शन एक मोड की तरह काम करते हैं। नेत्रहीन लोग इन फंक्शन व फीचर को अपने हिसाब से सलेक्ट कर सकते हैं।

श्रेयस के मुताबिक इस चश्मे को बनाने की प्रेरणा उन लोगों को अपने एक दोस्त से मिली। वो कहते हैं,  ‘हैदराबाद में हमारे एक दोस्त हैं, जो नेत्रहीन हैं। उन्हें देखकर और उनसे बातचीत करके जाना कि नेत्रहीन लोगों को अपने जीवन में किन-किन समस्याओं का सामना करना पड़ता है। यहीं से टेक्नोलॉजी के जरिए नेत्रहीन लोगों के जीवन को संवारने का ख्याल आया और हमने विश्रुति चश्मा बनाया।

श्रेयस कहते हैं, ‘इसके अलावा हमने इस चश्मे को बनाने से पहले बहुत से नेत्रहीन लोगों से मुलाकात की और उनकी परेशानियों को जाना। वो कहते हैं, हमारे प्रतिद्वंदी नेत्रहीनों को बताते हैं सामने कुछ है और हम बताते हैं सामने क्या है। हमारा ऑडियो सिस्टम अभी फीमेल वॉयस पर है। श्रेयस के मुताबिक, हमने इस चश्मे का पायलट नेशनल ब्लाइंड एसोसिएशन बेंगलुरु में किया है। यहां इस चश्मे को नेत्रहीन लोगों को पहनने के लिए दिया गया और उनसे फीडबैक लिया गया। वो बताते हैं कि इस चश्मे को बनाने के लिए डिपार्टमेंट ऑफ साइंट एंड टेक्नोलॉजी  ने हमारी आर्थिक मदद की। इसके अलावा SINE ने हमें इंटेल के साथ लिंक करवाया। श्रेयस का कहना है कि अभी इस प्रोजेक्ट के लिए हम निवेश तलाश रहे हैं। वो अपने इस इनोवेशन को सोशल इनोवेशन बताते हैं। वो कहते हैं कि इंडियन मार्केट में इस चश्मे की कीमत 8-10 हजार रुपये के बीच रखने की सोच रहे हैं।

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