भारत में मिल गया है ड्रोन को ग्रीन सिग्नल, जानिये इससे जुडी महत्वपूर्ण जानकारियां

अगर आप भी ड्रोन उड़ाने की इच्छा रखते हैं तो अब इसे आसानी से पूरा कर सकते हैं, क्योंकि सरकार ने दिसंबर से ड्रोन उड़ाने को लीगल कर दिया है।

ड्रोन शब्द के कई भिन्न अर्थ हैं और यह पुराने अंग्रेजी शब्द ड्रान से लिया गया है, जिसका अर्थ है ‘नर मधुमक्खी’। लेकिन जब एक बिजली के डिवाइस के रूप में एक ड्रोन के बारे में बात करते हैं, तो हम मिसाइल या रिमोट-कंट्रोल पायलट विरहित विमानों के बारे में सोचते हैं। Aviation और Space में, एक ड्रोन किसी बिना पायलट के विमान या अंतरिक्ष यान को रेफर करता है। इसके लिए एक अन्य शब्द हैं, और वह हैं “Unmanned Aerial Vehicle” या UAV है।

google

एक मानव रहित विमान या जहाज, जो स्वायत्तता से मानव नियंत्रण के बिना या दृष्टि की रेखा से परे, नेविगेट कर सकता हैं। एक और इस्तेमाल की जाने वाली डेफिनेशन है: “ड्रोन किसी भी मानव रहित विमान या जहाज है जो दूर से कंट्रोल किया जाता है”।

ड्रोन को ग्रीन सिग्नल

google

एविएशन मिनिस्ट्री ने सोमवार को ड्रोन पॉलिसी जारी की है। इसमें ड्रोन तकनीक के कमर्शल यूज को दिसंबर से मंजूरी दी गई है। फिलहाल सरकार ने लाइन ऑफ साइट ड्रोन को मंजूरी दी है। हालांकि, इस कंडीशन को आनेवाले वक्त में हटाया भी जा सकता है। सरकार ने ड्रोन्स को कुल पांच कैटिगरी में बांटा है। सबसे छोटी कैटिगरी को नैनो कैटिगरी नाम दिया गया है। इसमें 250 ग्राम तक वजन ले जाया जा सकता है, ऐसे करके वजन सीमा को 150 किलोग्राम तक बढ़ाया जा सकता है। पहली दो कैटिगरी (250 ग्राम और 2 किलो) वाले ड्रोन को छोड़कर सभी कैटिगरी के ड्रोन को रजिस्टर करवाना होगा। फिर उनका यूनीक आइडेंटिफिकेशन नंबर (UIN) भी जारी होगा। पहली दो कैटिगरी को छूट इसलिए दी गई है क्योंकि, उनका इस्तेमाल बच्चे खेलने के लिए करते हैं।

ड्रोन से संबंधित कुछ सरकारी नियम

google

ड्रोन का लाइसेंस लेने के भी कुछ नियम बनाए गए हैं। जैसे उम्र 18 साल होनी चाहिए, दसवीं क्लास तक पढ़ाई की होनी चाहिए और ड्रोन के लिए अंग्रेजी आनी भी जरूरी है। साथ ही कुछ एरिया ‘नो फ्लाइ जोन’ घोषित किए गए हैं।

google

इसमें इंटरनैशल बॉर्डर के पास के एयरपोर्ट्स, विजय चौक, सचिवालय, मिलिट्री इलाके आदि शामिल हैं। एविएशन मिनिस्टर जयंत सिन्हा ने इस मौके पर कहा कि फिलहाल के लिए लाइन ऑफ साइट आगे वाले ड्रोन को मंजूरी दी है, आने वाले वक्त में बियॉन्ड लाइन ऑफ साइट ड्रोन को मंजूरी मिल सकती है।

पॉलिसी में जो बयान है वह इस प्रकार है, ‘मानवरहित एयरक्राफ्ट ऑपरेटर परमिट (UAOP) रिमोटली एयरक्राफ्ट सिस्टम (RPAS) ऑपरेटर्स के लिए जरूरी होगा। RPAS जो 50 फीट, 200 फीट के नीचे या सुरक्षा, सेंट्रल एजेंसी के द्वारा इस्तेमाल हो रहे हैं उनके लिए ये नहीं चाहिए होगा।’

Facebook Comments