जानिए क्यों नहीं रुकवाई गांधी जी ने भगत सिंह की फांसी

माना जाता हैं,कि नेहरु जी और गांधी जी अगर चाहते तो भगत सिंह और उनके साथियों की फांसी को रुकवा सकते थे लेकिन उन्होंने ऐसा नहीं किया।

गांधीजी और भगत सिंह के कारनामे बिल्कुल अलग थे गांधीजी अहिंसावादी थे और ये सत्याग्रह के माध्यम से ही भारत को अंग्रेजों से स्वतंत्रता दिलाना चाहते थे।जबकि भगत सिंह अंग्रेजों से लड़कर अपना हक लेना चाहते थे और अपने देश को आजाद कराना चाहते थे।

उन दिनों भगत सिंह का नाम पूरे देश में बहुत तेजी से फैल रहा था और देश के युवा भगत सिंह के कारनामों से काफी ज्यादा प्रभावित हो रहे थे।जोकि गांधी जी और नेहरू जी को बिल्कुल रास नहीं आई।

गांधी जी और नेहरू जी को डर था कि उनका नाम भगत सिंह के नाम के आगे दब जाएगा और इतिहास में अपना नाम ऊंचा रखने के लिए भगत सिंह की फांसी के मामले में कुछ नहीं किया सेंट्रल असेंबली बम कांड की घटना 8 अप्रैल 1929 को घटी थी इस घटना को अंजाम देने के बाद भगत सिंह वहां से भागे नहीं बल्कि अपनी गिरफ्तारी दे दी।

गांधी जी ने गांधी इरविन पैक्ट 5 मार्च 1931 को साइन किया था जब भगत सिंह की फांसी का मामला काफी गरम था गांधी जी गांधी इरविन पैक्ट साइन करने से पहले यह प्रस्ताव रख सकते थे कि भगत सिंह और उनके दो साथियों को पहले रिहा करो फिर मैं साइन करूंगा लेकिन उन्होंने ऐसा नहीं किया अगर वह साइन करने से हट जाते तो अंग्रेज जरूर भगत सिंह और उनके दो साथियों को आजाद कर देते।

लाहौर जेल के जेलर ने भी गांधी जी को पत्र लिखकर पूछा था कि इन लोगों को फांसी देने से देश में माहौल तो नहीं बिगड़ेगा तब गांधी जी ने कहा था कि आप अपना काम करें ऐसा कुछ नहीं होगा प्रोफेसर कपिल कुमार की किताब के अनुसार गांधी और नेहरू भगत की रिहाई करवा सकते थे लेकिन उन्हें ऐसा नही किए।

पंडित मदन मोहन मालवीय ने 14 फरवरी 1931 को भगत सिंह और उनके साथियों की फांसी रुकवाने के लिए लौड अरविंद के सामने मर्सी पिटीशन दायर की थी तब अरविंद ने कहा था कि आप कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष हैं। इसलिए आपको इस पिटीशन के साथ 20 अन्य कांग्रेस सदस्यों की भी सहमति पत्र लाने होंगे।

मालवीय जी ने नेहरू जी और गांधी जी से इस बारे में बात की तो उन्होंने इस बात पर सहमति नही दी इसलिए मालवीय जी को अन्य कांग्रेस सदस्यों की सहमति भी नहीं मिली रिटायर होने के बाद मालवीय जी ने लंदन में कहा था कि हम जरूर भगत सिंह और उनके साथियों को फांसी देने से रूकवा सकते थे अगर नेहरू जी और गांधी जी चाहते तो पर उनहोंने ऐसा नही किया।

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