मां ने बेच दिए थे गहने, बेटे ने जीता सिल्वर

भारतीय तीरंदाज रजत चौहान एशियाई खेलों में लगातार दूसरा मेडल जीतकर खुश हैं। उन्होंने तीरंदाज ने जब अपना करियर शुरू किया तब सोचा न था कि यह एक महंगा खेल है। प्रोफेशनल लेवल की आर्चरी किट की कीमत 2 लाख रुपए थी। मिडलक्लास फैमिली से ताल्लुक रखने वाले रजत असमंजस में थे कि इतनी बड़ी रकम कैसे जुटाए पाएंगे। माता-पिता ने तीरंदाजी के प्रति जुनून रजत के जुनून को समझा और उन्हें सपोर्ट किया। अपनी उम्र भर की जमापूंजी चौहान परिवार ने बेटे को तीरंदाज बनाने के लिए लगा दी। उस दो लाख रुपए के तीर-कमान से सिल्वर ने अपना तीरंदाजी करियर शुरू किया।

24 वर्षीय खिलाड़ी एक और चीज के लिए भी इतना ही खुश है और वह है पांच प्रयास के बाद 12वीं की परीक्षा उत्तीर्ण करना। पिछले एशियाई खेलों में कंपाउंड टीम का गोल्ड मेडल जीतने वाले चौहान ने तीरंदाज के रूप में काफी कुछ हासिल किया है। उन्हें आम जन की तरह स्कूल, कॉलेज और फिर उच्च शिक्षा पर चलने की जरूरत नहीं थी लेकिन वह इससे सहमत नहीं हैं।

देश को सिल्वर मेडल जिताने वाले रजत चौहान की कहानी कुछ ऐसी ही है। एशियन गेम्स 2018 में साथी तीरंदाज संदीप कुमार और अभिषेक वर्मा संग सिल्वर मेडल जीतकर तिरंगा लहराने वाले सिल्वर चौहान के परिवार ने उन्हें पहला प्रोफेशनल तीर-कमान दिलाने के लिए अपना सबकुछ दांव पर लगाया था।

मां निर्मला ने बेटे से छुपकर गहने गिरवी रखे, वहीं पिता ताराचंद ने मेहनत की कमाई से खरीदी कार को बेच दिया लेकिन आज रजत ने एशियन गेम्स में एक बार फिर मेडल जीतकर अपने माता-पिता की मेहनत को सफल बना दिया।

आपको बता दें कि रजत महज 18 साल के थे जब उन्होंने फरवरी 2012 में बैंकॉक में हुई एशियन ग्रांप्री आर्चरी में सिल्वर मेडल जीता। उसके बाद उन्होंने पीछे मुड़कर नहीं देखा और एशियन गेम्स 2014 में तीरंदाज रजत ने गोल्ड और अब एशियन गेम्स 2018 में सिल्वर मेडल हासिल किया है।

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