सूर्य के प्रकोप और रोगों से बचने के लिए नहाने से पहले जरूर करें ये काम….

गर्मी अधिक होने के कारण अन्य महीनों की अपेक्षा इस माह में जल का वाष्पीकरण अधिक होता है और कई नदी, तालाब व पोखर सूख जाते हैं। अत: इस माह में जल का महत्व दूसरे महीनों की तुलना में ओर बढ़ जाता है। यही कारण है कि इस माह में जल का पूजन किया जाता है। वैदिक व पौराणिक शास्त्रों में ऋषि मुनियों ने जल को सर्वाधिक पवित्र व जीवनदायिनी माना है। 

सनातन धर्म में जल को वरुण देव कहा गया है। वरुण देव को देवताओं का देवता कहा गया है। देवताओं के तीन वर्गो पृथ्वी, वायु और आकाश वर्गों में वरुण देव को सर्वोच्च स्थान प्राप्त है। देवताओं में तीसरा स्थान ‘वरुण देव’ का माना जाता है। वरुण देव को समुद्र का देवता, विश्व के नियामक व शासक सत्य का प्रतीक, ऋतु परिवर्तन, दिन-रात का कर्ता-धर्ता माना जाता है।

 

पाश्चात्य ज्योतिष में वरुण देव को यूरेनस ग्रह कहा गया है। वरुण देव ऋतु के संरक्षक हैं इसलिए इन्हें ‘ऋतस्य-गोप’ भी कहते हैं। वरुण देव देवलोक में सभी सितारों का मार्ग निर्धारित करते हैं। वरुण देव पश्चिम दिशा के लोकपाल व जल के अधिपति व जल के ही निवासी हैं। शास्त्रों ने गंगा नदी को ज्येष्ठ भी कहा है क्योंकि गंगा नदी अपने गुणों में अन्य नदियों से बड़ी है। ऐसी मान्यता है कि नर्मदा व यमुना गंगा नदी से बड़ी और विस्तार में ब्रह्मपुत्र बड़ी है किंतु गुणों, गरिमा व महत्त्व की दृष्टि से गंगा नदी बड़ी है। इसी कारण इस महीने में गंगाजल के माध्यम से वरुण देव को पूजा जाता है। इस माह में वरुण देव व गंगा पूजन से सभी रोगों का शमन होता है, सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं तथा दुखों का नाश होता है।

विशेष पूजन विधि: घर के ईशान कोण में लाल कपड़ा बिछाकर पानी से भरे हुए तांबे के कलश में थोड़ा सा गंगाजल मिलाकर उसे स्थापित कर विधिवत पंचोपचार पूजन करें। कलश में दूध, शहद, जौव, अक्षत, मूंग, गुड व शहद मिलाएं। सिंदूर मिले घी का दीप करें, सुगंधित धूप करें। सिंदूर से तिलक करें। लाल फूल चढ़ाएं। गुड़ से बनी खीर का भोग लगाएं तथा किसी माला से इस विशेष मंत्र का 1 माला जाप करें। पूजन उपरांत भोग को जल प्रवाह कर दें।

पूजन मुहूर्त: दिन 11:30 से दिन 12:30 तक है।
पूजन मंत्र: ॐ अपां पतये वरुणाय नमः॥

उपाय

  • सभी रोगों के नाश के लिए वरुण देव पर चढ़े चांदी के सिक्के को पानी में डालकर रोज़ स्नान करें।
  • सभी मनोकामनाओं की पूर्ति के लिए जल में अपनी छाया देखकर चंद्रमा को अर्ध्य दें।
  • सभी दुखों के नाश के लिए वरुण देव पर चढ़े सफ़ेद चंदन से रोज़ तिलक करें।
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