कल से शुरु है चातुर्मास, नहीं हो सकेंगे मांगलिक कार्य

हरिशयनी एकादशी 23 जुलाई सोमवार को है और इसी दिन से चातुर्मास शुरू हो रहा जो 18 नवंबर तक चलेगा। इस दौरान शादी-ब्याह, मुंडन-छेदन और गृह प्रवेश जैसे शुभकार्य वर्जित रहेंगे। 19 नवंबर को देवोत्थानी एकादशी के शुभारंभ के साथ सभी शुभ कार्य फिर आरंभ हो जाएंगे।

 

शक्ति ज्योतिष केंद्र के पंडित शक्तिधर त्रिपाठी के अनुसार आषाढ़  शुक्ल एकादशी (हरिशयनी एकादशी) से कार्तिक शुक्ल एकादशी (देवोत्थानी एकादशी) तक चार माह का समय चातुर्मास या चौमासा कहा गया है। जिसका प्रारम्भ सोमवार से हो रहा है। इस दिन से श्रीविष्णु जी पाताल लोक में राजा बलि के द्वार पर सोने के लिए चले जाते हैं। इस चार माह में श्रावण विशेष महत्व का है जो महाकाल की उपासना का विशेष समय होता है। शेष तीन माह श्रीविष्णु जी को समर्पित करना चाहिए।

चौमासा का है वैज्ञानिक महत्व:

इसका वैज्ञानिक महत्व भी है। इसके अनुसार वर्षा ऋतु का मध्य और शरद ऋतु का आरंभ होने से जलवायु परिवर्तन तथा ऋतु संक्रमण की स्थिति के कारण भोजन व जल में हानिकारक वैक्टीरिया की वृद्धि हो जाती है। इनके प्रतिकूल प्रभाव से बचाने के लिए चातुर्मास के नियम संयम बताए गए हैं। इस दौरान पलंग का प्रयोग, शहद, मूली व बैगन आदि का भोग वर्जित है। चातुर्मास में अधिक से अधिक मौन रहें। श्रावण में साग, भादो में दही और क्वार में दूध तथा कार्तिक में उरद का त्याग करना चाहिए।

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