मैं नहीं चाहता कि बच्चे मुझसे ज्यादा नैनी को प्यार करें

शाहिद कपूर अक्सर एयरपोर्ट पर अपनी बेटी मीशा को गोद में लिए नजर आते हैं। अपने बेटे ज़ैन के जन्म के बाद उन्होंने फिल्म बत्ती गुल मीटर चालू के प्रमोशंस को कैंसल करने में भी गुरेज नहीं किया। हाल ही में दिल्ली आए शाहिद ने हमसे परिवार सहित तमाम विषयों पर की खास बातचीत
आप अक्सर अपनी बेटी को गोद में लिए नजर आते हैं? 
मैं अपनी बेटी मीशा से बेहद प्यार करता हूं। मुझे जब मौका मिलता था, तो मैं उसे गोद में उठाकर चल देता हूं। जबकि मेरी वाइफ मुझे बार- बार टोकती है कि उसे गोद से उतारो, तभी वह चलना सीख पाएगी। मेरी पूरी कोशिश रहती है कि मैं उसके साथ ज्यादा से ज्यादा टाइम बिताऊं। यह मैंने हमेशा से सोचा था। भले ही इसके लिए मुझे अपनी नींद कुर्बान करनी पड़े। दरअसल, यह सब मैंने बचपन से सीखा है। आप अगर अपने बचपन की यादों में जाएं, तो आप एक बेहतर पैरंट हो सकते हैं। मुझे याद है कि जब मैं छोटा था, तो मेरे नाना मुझे रोजाना स्कूल छोडऩे जाते थे। फिर चाहे वह किसी दिन बीमार क्यों ना रहे हों। वे अच्छी यादें आजतक मेरे मन में ताजा हैं। मेरे ख्याल से बच्चों के लिए छोटी-छोटी चीजें बेहद महत्वपूर्ण होती हैं। मैं भी इस बात का पूरा ध्यान रखता हूं कि मेरे बच्चे रोजाना जब सुबह सोकर उठें, तो वे अपने पापा के साथ कुछ टाइम बिता पाएं। वहीं रात को सोने से पहले भी उन्हें पापा के साथ कुछ टाइम जरूर मिलना चाहिए। आजकल मेड्स और नैनी भी होती हैं। कईं बार बच्चे पैरंट से ज्यादा उनसे ज्यादा कनेक्ट हो जाते हैं। इसलिए मेरी कोशिश रहती है कि मेरे बच्चों के साथ ऐसा कतई ना हो।
आप अपनी पैटरनिटी लीव छोड़कर प्रमोशन में हिस्सा ले रहे हैं? 
जी हां, आपने बिल्कुल सही कहा। मेरी फिल्म की रिलीज और बेटे ज़ैन का जन्म दोनों इतने नजदीक पड़ गए कि मेरे लिए दोनों चीजों को साथ मैनेज करना थोड़ा मुश्किल हो गया है। मैंने पहले सोचा था कि दो हफ्ते की पैटरनिटी लीव लूंगा। लेकिन ज़ैन का जन्म फिल्म की रिलीज से करीब दो हफ्ते पहले ही हुआ, तो मुझे पता था कि मैं थोड़ा तो जरूर फंसूंगा। फिल्म की रिलीज नजदीक होने की वजह से मेरा प्रमोशन के लिए भी निकलना जरूरी था। दरअसल, जब फिल्म की रिलीज नजदीक होती है, तो ऐक्टर को काफी नर्वसनेस हो जाती है। जब हम ज़ैन को हॉस्पिटल से घर लेकर पहुंचे, तो मीशा को तेज बुखार था। ऐसे में, मुझे तीन दिन तक कुछ और प्रमोशन कैंसल करने पड़े, क्योंकि फैमिली मेरी पहली प्रायरिटी है। हालांकि अभी भी मेरी दो हफ्तों की पैटरनिटी लीव पूरी नहीं हुई है, लेकिन मैं उसे बीच में छोड़कर प्रमोशन के लिए आ गया हूं।
आप काफी केयरिंग हसबैंड और फादर नजर आते हैं? 
बेशक, अब वह जमाना नहीं रहा, जब घर और बच्चों को संभालना सिर्फ पत्नी की जिम्मेदारी है। हमें ऐसा एटिट्यूड नहीं रखना चाहिए कि मैं काम पर जा रहा हूं, बीवी सब संभाल लेगी। घर पर हाथ बंटाना बेहद जरूरी है। इसलिए जब मुझे लगा कि घर पर मेरी सबसे ज्यादा जरूरत है, तो मैंने अपने प्रमोशन कैंसल कर दिए। मैं ऐसे वक्त में मीरा को अकेली नहीं छोड़ सकता था।मेरे ख्याल से आज के जमाने में किसी भी पति को ऐसी पुरानी सोच नहीं रखनी चाहिए कि बच्चे और घर सिर्फ पत्नी की ही जिम्मेदारी हैं। जब बच्चे और घर मेरे भी हैं, तो वे मेरी भी उतनी ही जिम्मेदारी हैं, जितनी कि मेरी पत्नी की।

मीशा का नाम तो आपके और मीरा के नाम पर है। लेकिन ज़ैन का नाम किसके नाम पर है? 
दरअसल, हमने मीशा के जन्म से पहले ही मीशा और ज़ैन दो नाम सोच हुए थे कि अगर बेटी हुए मीशा और बेटा हुआ, तो ज़ैन नाम रखेंगे। तो यह समझ लीजिए कि ज़ैन नाम हमारे स्टॉक में था। इसलिए बेटे के जन्म के साथ ही हमने उसका नाम ज़ैन अनाउंस कर दिया था।

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