क्या इस देश मैं तिरंगा लहराना और भारत माता की जय बोलना जुर्म है,तो मुझे भी गोली मार दो : चन्दन की माँ

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कल जो बाक्या हुआ है 26 जनवरी 2018 को उत्तर प्रदेश के कासगंज मैं उस घटना की जितनी निंदा की जाए बह कम ही होगी। उस घटना ने न सिर्फ समाज को ही बल्कि हर उस इंसान को अंदर तलक झकझोर दिया है जो इस देश मैं खुद को स्वतंत्र बोलता है। अब सबाल यह उठता है की यह कैसी स्वतंत्रता है इस देश मैं की अगर कोई इंसान बन्दे मातरम बोलना चाहता है और अगर बह अपने हांथो से तिरंगे को उठाना चाहता है तो उसे सरेआम मौत के घात उतार दो। दुनिया मैं ऐसी स्वतंत्रता तो किसी देश मैं नहीं मिलती है लोगो को की स्वतंत्रता के नाम पर मिलने बाली छूट का नाजायज फायदा उठाया जाये और जो लोग देश के लिए बन्दे मातरम कहना चाहते है उन्हें मौत की सजा दे दो।

यह बही देश है जंहा लाखो स्वतंत्र सेनानियों ने बन्दे मातरम बोल कर इस देश को स्वतंत्र करबाया अंग्रेजो से। लेकिन आज भी यह देश कुछ कंटरपंथी सोच बाले लोगो के आगे गुलाम है। जो भी इस देश मैं बन्दे मातरम आगे से बोलना चाहेगा उसे अब एक बार नहीं हजार बार सोचना पड़ेगा की क्या बह सही कर रहा है की नहीं बन्दे मातरम बोल कर और तिरंगे को अगर बह लेकर जा रहा है तो क्या बह भी बह सही कर रहा है की नहीं। क्यूंकि कुछ कंटरपंथी सोच के लोग उसका कंही आगे इन्तजार तो नहीं कर रहे है कंही उसे ऐसा करने के लिए मौत की सजा तो नहीं मिल जाएगी। ऐसे ही हजारो सबलो के घेरे मैं अब लोग जीते रहेंगे क्यूंकि यह देश आज भी कुछ कंटरपंथी सोच रखने बालो से गुलाम है।

मामला उत्तर प्रदेश के जाने माने शहर काशगंज का है। जंहा 26 जनवरी 2018 को पूरा भारत देश अपने गणतंत्र दिवस मना रहा था। उसी रोज सुबह कोई कासगंज जिले के अंदर सुशिल गुप्ता का बेटा अपने कुछ दोस्तों के साथ मिल कर अपने घर से अपने हांथो मैं तिरंगा लेजर निकला था। और फिर बह तिरंगा यात्रा मैं शामिल हो गया ,किसी को भी यह नहीं मालूम था की चंदन आज के बाद कभी अपने आजाद होने की खुशी मैं गणतंत्र दिवस नहीं मना पायेगा और बह लौट कर कभी भी बापिस अपने घर नहीं आएगा। क्यूंकि कुछ
कंटरपंथी सोच बाले लोग उसे कभी बापिस नहीं आने देंगे। और उसे अपने हांथो मैं तिरंगा लेकर बन्दे मातरम बोलने की कीमत अपनी जान देकर चुकानी पड़ेगी। क्युकी देश जरूर अपने गणतंत्र दिवस की बर्षगांठ मन रहा हो लेकिन देश आज भी कंटरपंथी सोच का गुलाम है।

चन्दन गुप्ता तो सिर्फ अपने दोस्तों के साथ मिल कर तिरंगा यात्रा मैं शामिल हो कर बन्दे मातरम के नारे लगा रहे थे। लेकिन तभी रस्ते मैं एक मुश्लिम बस्ती आ गई। और तभी कुछ कंटरपंथी सोच रखने बाले जिहादी पकिस्तान जिंदाबाद के नारे लगाते हुए उन लोगो पर टूट पड़े। और आपको पता होना चाइये की हथियारों की कमी इन जिहादियों के पास बिलकुल भी नहीं होती है। और फिर इन जिहादियों ने उस यात्रा के ऊपर गोली बारी भी करी और चन्दन गुप्ता को मौत के घाट उतार दिया।

 

चन्दन अपने हांथो मैं तिरंगा लेकर घर से निकला जरूर था मगर घर बापिस उसका शब् आया बह भी तिरंगा मैं ही लिपटा हुआ। अब चन्दन के परिबार ने हमेशा के लिए उसे खो दिया। चन्दन की गलती सिर्फ इतनी थी की उसे इस कंटरपंथी सोच रखने बाले गुलाम देश मैं तिरंगा उठा कर बन्दे मातरम बोल दिया।

पत्रकारों से बातचीत मैं चन्दन की माता जी ने कहा की मेरे बेटे की छाती पर गोली मार दी गयी ,मेरा बेटा तो अपने देश मैं ही तिरंगा लहरा रहा था। और अगर इस देश मैं अपने देश का तिरंगा लहराना ही गुनाह है तो उसके भी छाती पर ही गोली मार दो। क्यूंकि इस देश मैं बन्दे मातरम और तिरंगा लहराने बाले लोगो के साथ अब लोग यही कर रहे हैं।

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