यहां एक दिन में बनते हैं 1400बल्ले, जानिए कौन है ये शख्स, इनके वजह से खिलाड़ी बनाते हैं रिकॉर्ड

जिनमें एक नाम सरीन स्पोर्ट्स इंडस्ट्री का आता है। इस कंपनी के एमडी जतिन सरीन वो शख्स हैं, जो कई बड़े खिलाड़ियों के लि बल्ले तैयार कर चुके हैं। इनके कारखाने में 1300 से 1400 बल्ले हर दिन बनते हैं। उनके कारखाने में 100 साल पुराने बल्ले ही नहीं, वे बैट भी मौजूद हैं जिनसे खेलते हुए दुनिया के दिग्गज बल्लेबाजों ने कई रिकॉर्ड बनाए हैं।

सरीन स्पोर्ट्स इंडस्ट्रीज के एमडी जतिन के चार एकड़ में फैले कारखाने की पहली मंजिल पर उनके दफ्तर में ऐसे बल्ले दीवारों पर टंगे हैं।  40 साल के जतिन के पिता एन के सरीन ने 1969 में ये कंपनी शुरू की। ये एन के सरीन की जिद और जूनून ही होगा, कि उन्होंने उस दौर में क्रिकेट बल्ले का कारखाना खोला, तब भारत में क्रिकेट बहुत फैला हुआ नहीं था। जतिन के दादा बंटवारे के बाद पाकिस्तान से मेरठ आकर बसे थे। उन्होंने बैडमिंटन के शटलकॉक बनाना शुरू किया, लेकिन उनके बेटे को इसमें रूचि नहीं थी, उन्होंने क्रिकेट के कामों में दिलचस्पी दिखाई।

साल 1997 में जतिन ने बिजनेस अपने हाथ में लिया। मेरठ से ग्रेजुएट जतिन बल्ला बनाने का गुर सीखने इंग्लैंड चले गए।  उस दौर में जॉन न्यूब्री के बनाए बल्लो की धूम थी। जतिन ने एक साल उनके साथ वो सब बारीकियां सीखी जो वर्ल्डक्लास बल्ला बनाने को जरुरी है। जब उनकी कंपनी में काम शुरू हुआ तब दुनिया में दो तरह के बल्ले बनते थे। एक कश्मीरी विलो के दूसरे इंग्लिश विलो के। इंग्लिश विलो से सिर्फ सिर्फ रईस लोग खेलते थे, ये महंगे थे। कंपनी ने इंग्लिश विलो मंगवाकर बल्ले बनाना शुरू किया।

तेंदुलकर और गांगुली सहित कई क्रिकेटर्स से चर्चा कर उन्होंने देश में 28 मिलीमीटर चौड़ाई वाले बल्ले की जगह 40 मिलीमीटर के मोटे बल्ले बनाना शुरू किए। इनके हैंडल खास तकनीक से बनाये ताकि लोच बनी रहे। 2006 में कंपनी ने नया कारखाना खोला, जहां पर ज्यादातर हाथ से बल्ले बनाए जाते हैं। यहां 700 रु. से लेकर 25,000 रु. कीमत वाले बल्ले बनते हैं।

आज के समय में विराट कोहली, रवि बोपारा समेत 50 से ज्यादा अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी एसएस बैट से ही खेलते हैं। चार दर्जन से ज्यादा देशों में इस बल्ले के डीलर हैं। आज जतिन का दुनियाभर में ऐसा जलवा है कि एसएस का बल्ला दुनिया के कौने-कौने में अपनी छाप छोड़ रहा है।

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