लाल किले पर लहराए जाने वाले खादी के तिरंगे की कीमत 6500 रुपए, कर्नाटक से आता है…दो महीने पहले दिया जाता है ऑर्डर

15 अगस्त पर लाल किले पर फहराया जाने वाला राष्ट्र ध्वज कर्नाटक के हुबली में तैयार होता है। इसके लिए खादी का कपड़ा बालाकोट जिले के एक गांव के मजदूर बनाते हैं। कर्नाटक खादी ग्रामोद्योग संयुक्त संघ (केकेजीएसएसएफ) यह तिरंगा बनाता है। यह देश में ऐसा इकलौता संगठन है, जिसे तिरंगा बनाने के लिए भारत सरकार से लाइसेंस मिला हुआ है। यहां ब्यूरो ऑफ इंडियन स्टैंडर्ड (बीआईएस) के मुताबिक झंडे तैयार किए जाते हैं। केंद्र और राज्य सरकारों के अलावा निजी संस्थाएं भी जरूरत के हिसाब से ऑर्डर देकर यहीं से तिरंगा मंगाती हैं।

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दो महीने पहले आता है ऑर्डर : फेडरेशन के सचिव एचएन एंटिन ने भास्कर को बताया कि फेडरेशन में 126 कर्मचारी सालभर राष्ट्र ध्वज बनाते हैं। इनमें ज्यातादर महिलाएं हैं। ध्वज के लिए खादी बालाकोट के तुलसीगेरी गांव में तैयार की जाती है। इसके बाद फेडरेशन के हुबली सेंटर में तिरंगे की सिलाई होती है। स्वतंत्रता दिवस के मौके पर लाल किले पर फहराए जाने वाले तिरंगे का ऑर्डर करीब दो महीने पहले मिल जाता है।

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6 चरणों में बनाता है राष्ट्र ध्वज : लाल किले पर फहराया जाने वाला तिरंगा 12×8 फीट का होता है। इसकी कीमत 6500 रुपए होती है। तिरंगा बनाने के लिए छह चरण होते हैं। इसके लिए पहले से हाथ से कताई होता है। फिर बुनाई, रंगाई, चक्र की छपाई, सिलाई और बंधाई करनी पड़ती है। एंटिन के मुताबिक, हाई मास्ट पर 21×14 फीट के झंडे लगाए जाते हैं। इसकी कीमत 17,800 रुपए होती है। मंत्रियों की कारों में लगने वाला झंडा 300 रुपए और टेबल पर लगाने वाला तिरंगा 200 रुपए में मिलता है। 1.5×1 फीट के राष्ट्र ध्वज की कीमत 600 रुपए होती है। फ्लैग कोड के मुताबिक राष्ट्र ध्वज का आकार 3:2 यानी आयताकार होना चाहिए। लेकिन यह 11 अलग-अलग आकार में बनाए जाते हैं। जैसे- वीवीआई फ्लाइट के लिए 450×300 मिलीमीटर, मंत्रियों की गाड़ियों के लिए 225×150 मिलीमीटर, मेज पर लगाने के लिए 150×100 मिलीमीटर, ऊंचाई पर लगाने के लिए 21×14 फीट।

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तिरंगा तैयार करने में चूक की गुंजाइश नहीं : एंटिन ने बताया कि तिरंगा तैयार करने के लिए बीआईएस की गाइडलाइन्स का सख्ती से पालन करना होता है, क्योंकि राष्ट्र ध्वज की रंगाई, आकार, धागे की मात्रा और सूत की मजबूती में किसी तरह की गलती की गुंजाइश नहीं है। यहां तक कि सिलाई के मानक भी पहले से तय हैं। फ्लैग कोड ऑफ इंडिया 2002 के तहत तय मानकों का उल्लंघन गंभीर अपराध है और ऐसा करने पर सजा और जुर्माना या दोनों हो सकता है।

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1957 में हुई थी फेडरेशन की शुरुआत : कर्नाटक में केकेजीएसएसएफ की स्थापना एक गांधीवादी समूह ने खादी और ग्रामोद्योग को बढ़ावा देने के लिए की थी। वेंकटेश टी मगादी संघ के पहले चेयरमैन बने थे। 2004 में फेडरेशन ने राष्ट्रध्वज बनाने के लिए एक यूनिट शुरू की। बाद में इसे खादी एंव ग्रामोद्योग कमीशन (केवीआईसी) से लाइसेंस दिया गया। संघ को 2006 में ब्यूरो ऑफ इंडियन स्टैंडर्ड (बीआईएस) सर्टिफिकेट मिला था। हुबली में खादी संघ का मुख्यालय 17 एकड़ में फैला है।

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