हमेशा अच्छे और सकारात्मक विचार ही मन में लायें,रहेगा सब ठीक…..

हमें यह समझने की जरूरत है कि हमारे मन में उठने वाले विचार महज उस स्तर तक ही नहीं रहते। वे हमारे द्वारा महसूस की जाने वाली भावनाओं में तब्दील हो जाते हैं। अपने विचारों में आने वाले उतार-चढ़ाव की वजह से कभी हम बहुत ज्यादा खुश हो जाते हैं तो कभी घोर निराशा के बादल हमें घेर लेते हैं। इसलिए यह बहुत आवश्यक है कि हम हमेशा अच्छे और सकारात्मक विचार ही मन में लायें।

अकसर लोगों को भ्रम हो जाता है कि उनका शरीर और दिमाग एक प्रकार का दीया है, जिसमें उनके विचारों, भावनाओं और क्रियाओं से प्रकाश उत्पन्न होता है। लेकिन मेरा मानना है कि हम ऊर्जा हैं, जो अपने विचारों और भावनाओं रूपी दीये से प्रकाश पैदा करते हैं। स्वयं को लेकर इस बात का आभास मुझको एक सपने ने दिलाया। मैंने देखा कि बहुत सारे अन्य लोगों के साथ मैं एक लिफ्ट में फंस गयी हूं।

सब इतना डरे हुए थे कि मृत्यु सामने नजर आ रही थी, लेकिन मेरे अंतर्मन से आ रही आवाज बार-बार मुडो हौसला दे रही थी कि मुझे कुछ नहीं होगा। तब मुझको एहसास हुआ कि वह आवाज कुछ और नहीं, बल्कि मेरी ऊर्जा ही थी। तब मेरी समझ में आया कि हम जैसा सोचते हैं, वैसा ही मूर्त रूप में हमारे सामने घटित होता है। इसका अर्थ यह हुआ कि हम स्वयं ही वह ऊर्जा स्रोत हैं, जो हमारे मन में उठने वाले विचारों के लिए दीये का काम करता है।

गहरी सांस लें : किसी तनावपूर्ण स्थिति में अकसर हमारे दिमाग और शरीर में तालमेल खत्म हो जाता है। ऐसी स्थिति में अपने विचारों पर से ध्यान हटाकर उसे अपने शरीर पर केंद्रित करें। कोई भी एहसास हमारे शरीर में लगभग 90 सेकेंड तक ही जीवित रहता है। अगर उसी समयावधि में हम उस पर काबू पा लेते हैं तो वह हमें प्रभावित नहीं कर पाता। इसलिए तनाव की स्थिति में दस तक गिनकर गहरी सांस लें और धीरे-धीरे बाहर छोड़ें। फिर अपने सीने पर हाथ रख कर सांसों को संयमित करें।

विचारों के कारण को पहचानें : जब गहरी सांसों द्वारा आप अपने विचारों पर काबू पा लें तो उन कारणों को पहचानने की कोशिश करें, जो तनाव की स्थिति उत्पन्न करते हैं। कारण कोई भी हो सकता है। यदि आप तमाम प्रयासों के बावजूद भी अपना वजन कम नहीं कर पा रहे, तो यह तनावपूर्ण स्थिति पैदा कर सकता है। या फिर सोशल मीडिया पर दूसरों की पोस्ट पढ़ने से भी तनाव होता है। सेहत और रिश्तों से जुड़ी बातें भी तनाव देती हैं। आपके साथ क्या कारण है, ये आपको पहचानना है।

तनाव के कारणों को तौलें : शांत दिमाग से स्वयं से पूछें कि जिन बातों पर आपको गुस्सा आ रहा है या चिंता हो रही है, क्या वास्तव में वे चीजें बहुत जरूरी हैं? कहीं आप अकारण ही तनाव तो नहीं ङोल रहे? अकसर हम हालात को अपने मन मुताबिक ही समझने लगते हैं, जबकि सच कुछ और ही होता है। कभी-कभी हमें मालूम होता है कि कुछ घटनाओं को घटित होने से हम नहीं रोक सकते, ऐसे में व्यर्थ तनाव लेने का कोई लाभ नहीं होता।

जो अच्छा लगता है, वही करें : हम सबके जीवन में कुछ न कुछ ऐसा अवश्य होता है, जो तमाम चिंताओं के बावजूद हमें सुकून और आनंद देता है। अपने जीवन के खुशनुमा पलों की तरफ ध्यान लगाएं। अपनी पसंद का संगीत सुनें, कोई अच्छी किताब पढ़ें या फिर किसी दोस्त से मिलें। ऐसा कुछ करें जिसे करने से आपको शांति मिले और तनाव खत्म हो। इस तरह आप तनाव में खुद को संयमित रख पाएंगे।

बुरे विचारों पर लगाए लगाम-
सोचना दरअसल हमारे पाचन तंत्र की तरह काम करता है। मतलब यह है कि जिस प्रकार हमारे द्वारा ग्रहण किया गया भोजन पचना एक स्वाभाविक प्रक्रिया है, उसी तरह दिमाग में हमेशा कोई ना कोई विचार आना भी एक ऐसी क्रिया है, जिसे हम रोक नहीं सकते। हमारे आस-पास घटने वाली घटनाएं भावनात्मक रूप से अलग-अलग तरीकों से हमें प्रभावित करती हैं। कुछ बहुत अच्छा होने पर जहां मन उत्साह और उमंग से भर जाता है, वहीं कुछ बुरा घटने पर दिल बैठ सा जाता है और शरीर तनाव में आ जाता है। हमारे दिमाग का काम हमें बुरे अनुभवों से बचाना होता है, इसलिए हमारा मस्तिष्क हमेशा खतरे को भांपता रहता है। भूतकाल के कटु अनुभव हमारे मस्तिष्क में एक नक्शा बना देते हैं, ताकि भविष्य में हम उन अनुभवों से दोबारा न गुजरें। हम जितना ज्यादा अपनी सोच पर लगाम कसने का प्रयास करते हैं, उतना ही अधिक विचारों के भंवर में उलझते जाते हैं। लेकिन विचारों को चुनना हमारे हाथ में होता है। इसलिए हमेशा सकारात्मक और अच्छे विचारों को अपने जीवन में प्राथमिकता दीजिए और कभी भी किसी विचार को स्वयं पर हावी मत होने दें। मैंने हमेशा इन सरल उपायों द्वारा स्वयं को मजबूत बनाया है और यकीनन आप भी ऐसा जरूर कर सकते हैं।

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