पहला टर्नओवर रहा 30 लाख, बिड़ला मंदिर में फोटो खींचने वाला कैसे बना 13000 कर्मचारियों का मालिक

नरेंद्र बंसल शुरू से व्यासायी बनना चाहते थे लेकिन पिता के काम से नहीं बल्कि खुद से। इसलिए उन्होंने 1980 में कॉलेज करने के साथ-साथ ऑडियो-वीडियो कैसेट्स का काम शुरू किया। उन्होंने होलसेल मार्केट से कैसेट्स खरीदकर पालिका बाजार में बेचने लगे। उस समय फ्री होम डिलीवरी की परिकल्पना नई थी, इसलिए उनका काम ठीक-ठाक चलने लगा। लेकिन इस काम में आगे तरक्की की संभावनायें कम होती देख उन्होंने पहले ही काम बंद कर दिया।

कुछ नया करने के जुनून में उन्होंने अपने एक दोस्त से पोलोराइड कैमरा लिया और दिल्ली के बिड़ला मंदिर में जाकर टूरिस्ट के फोटो खींचकर उसे चाभी के छल्लों पर चिपकाकर बेचने लगे। कुछ समय बाद उन्होंने यह काम भी छोड़ दिया। नरेन्द्र बंसल अलग-अलग व्यवसाय में हाथ आजमाते हुए दिल्ली के स्वामी श्रद्धानंद कॉलेज से कॉमर्स में स्नातक पूर्ण कर लिया।

उस समय भारत में आईटी प्रोडक्ट का बाजार जमने लगा था और कंप्यूटर और उससे संबंधित एक्सेसरीज की मांग बढ़ने लगी थी। इसी को देखते हुए उन्होंने नेहरु पैलेस में व्यवसाय शुरू कर लिया। वे फ्लॉपी डिस्क और कंप्यूटर की अन्य एक्सेसरीज ताइवान और हांगकांग से मंगवाकर सस्ते में बेचने लगे। नरेन्द्र बंसल जब भी बड़ी-बड़ी कंपनियों को देखते तो खुद की कंपनी बनाने का सपना बुनते रहते। . आखिरकार, 1996 में 20000 रुपये की बचत और अपने ब्रांड-नेम के एक प्रोडक्ट इथरनेट कार्ड के साथ अपनी कंपनी Intex Technologies की स्थापना की।

कंपनी का पहला टर्नओवर 30 लाख रहा। व्यवसाय बढ़ने पर उन्होंने प्रोडेक्ट में बढ़ोतरी करनी शुरू कर दी। स्पीकर, डीवीडी और होम थिरेटर जैसी सामान मार्केट में लाने लगे। उनका बाजार में होम थिरेटर लाने की सोच सफल साबित हुई। इसी वजह से कंपनी सफलता के पायदान पर पहुंच गई। कंपनी ने दिल्ली में अपना हेडऑफिस बनाया और देशभर में कई शाखाएं और सर्विस सेंटर खोल लिए।

2004 में कंपनी ने भारत में अपनी खुद की मैन्युफैक्चरिंग यूनिट खोल दिया और इसके बाद कई इलेक्ट्रॉनिक प्रोडक्ट का निर्माण भारत में ही होने लगा। आज कंपनी के पास 13000 से ज्यादा कर्मचारी है। 2016 में कंपनी का टर्नओवर 6 हजार करोड़ तक पहुंच गया था। फिलहाल, कंपनी की जिम्मेदारी नरेंद्र बंसल के बेटे केशव बंसल संभाल रहे है।

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