खुशखबरी : अब सरकारी स्कूलों में मिलेगा मिड-डे मील के खाने के साथ-साथ नास्ता भी

आने वाले दिनों में सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों को मिड-डे मील के साथ-साथ सुबह का नाश्ता मिलना भी शुरू हो सकता है। पिछले साल गुजरात में शुरू हुए सुबह के नाश्ते के सकारात्मक असर को देखते हुए केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्रालय अन्य राज्यों में भी इसे लागू करने के लिए राज्य सरकारों से बातचीत कर रहा है।

इस संदर्भ में मंत्रालय जल्द ही सभी राज्यों की बैठक बुलाएगा। गुजरात सरकार ने पिछले साल मिड-डे मील के साथ-साथ बच्चों को नाश्ता परोसना शुरू किया था। खास बात ये थी कि इसके लिए राज्य सरकार ने कोई अलग से बजट नहीं बनाया था, बल्कि मिड-डे मील योजना के तहत मिलने वाली खाद्य सामग्री से ही नाश्ता तैयार किया जाता है। दरअसल, अध्ययन में ऐसा पाया गया है कि पाचन क्षमता कमजोर होने के कारण ज्यादातर बच्चों को सिर्फ दोपहर के भोजन से पर्याप्त कैलोरी नहीं मिल पाती।

वहीं, सुबह से स्कूल आए बच्चों को भोजन के इंतजार में भूखे पेट बैठे रहना पड़ता है। इसी को ध्यान में रखते हुए गुजरात ने सुबह के नाश्ते का प्रयोग शुरू किया था। सूत्रों के मुताबिक, मानव संसाधन विकास मंत्रालय ने राज्य सरकारों से गुजरात मॉडल पर अपने यहां भी मिड-डे मील के अलावा सुबह का नाश्ता देने की अपील की है। अधिकतर राज्य इसके लिए तैयार हैं, लेकिन वे इसके लिए अलग से सहायता राशि चाहते हैं।

मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने हिन्दुस्तान से बातचीत में कहा कि हम इसके लिए अलग से पैसा नहीं दे सकते, क्योंकि हमारा बजट सीमित है। हालांकि, हम राज्यों को यह सुविधा दे सकते हैं कि केंद्र की ओर से जारी राशि में से बचने वाले पैसे को केंद्र को लौटाने के बजाए वह उसका इस्तेमाल कर ले।

स्कूल ड्रॉप आउट में कमी आई
72 फीसदी बच्चों का कहना है कि मिड-डे मील की वजह से कक्षा में पढ़ाई को लेकर उनकी एकाग्रता बढ़ी है। स्कूल जा रहे 92 फीसदी बच्चों को मिड-डे मील मिल रहा है। 92 फीसदी शिक्षकों और 80 फीसदी माता-पिता ने माना कि मिड-डे मील की वजह से स्कूलों में नामांकन और उपस्थिति बढ़ी है।

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