खुद नाव चलाकर नदी और पहाड़ों को पार कर पढ़ाने जाती हैं स्कूल…इस महिला टीचर को दिल से सलाम

जरा सोचिए अगर 10-20 किलोमीटर दूर आपका ऑफिस हो तो आपके ऊपर आफत का पहाड़ टूट जाता है। आपको रोज 20 किलोमीटर का सफर करना पहाड़ तोड़ने से कम नहीं लगता है। लेकिन ये कहानी पढ़कर आपको खुद पर शर्म आएगी। आपकी अपनी परेशानी कम लगने लगेगी। जी हां- हम बात कर रहे हैं एक ऐसी महिला टीचर की जिसने ये साबित कर दिया कि अगर आप चाहें तो कुछ भी नामुमकिन नहीं है।

नाव पर बैठी महिला का नाम उषा कुमारी है। उषा अगस्त्य ईगा विद्यालय में अकेली टीचर हैं। 16 सालों से उषा यही काम कर रही हैं। सरकार ने पिछड़े जनजातीय इलाकों में स्कूलों की शुरूआत 1999 में की थी। तब इस स्कूल में इकलौता एक टीचर था। उषा की कहानी बड़ी दिलचस्प है। वह जिस तरह बच्चों को पढ़ाने के लिए स्कूल तक पहुंचती हैं वह वाकई काबिलेतारीफ है। उषा का कहना है कि वह शाम को 8 बजे अपने घर पहुंचती हैं।

अगर उनकी तबीयत ठीक नहीं होती है या फिर, बारिश होने लगती है तब वो किसी स्टूडेंट के घर रूक जाती हैं। उषा ऐसा इसलिए करती हैं ताकि दूसरे दिन वह स्कूल आ सकें। इस स्कूल में कक्षा 1 से 4 तक की पढ़ाई होती है और सारे विषय को वह अकेले पढ़ाती हैं। उषा तिरूवनंतपुरम की रहने वाली हैं। वह रोज सुबह 7:30 बजे स्कूटी से अपने घर से निकलती हैं। इसके बाद वह नाव चलाकर पहाड़ी इलाके के किनारे पहुंचती हैं। इनका रास्ता यहां खत्म नहीं होता है। उषा को इसके आगे भी जाना होता है। यहां से उषा को एक लंबा रास्ता तय करना पड़ता है।

पहले दो किलोमीटर तक तो ठीक है लेकिन उसके बाद, और दो किलोमीटर की चढ़ाई है। उषा एक डंडे के सहारे पहाड़ पार करती हैं। उषा के साथ वो बच्चों भी होते हैं जिन्हें वह पढ़ाती हैं। स्कूल इतनी दूर होने के बाद भी उषा ने आजतक हिम्मत नहीं हारी।आपने अपने आसपास कई ऐसे टीचर देखे होंगे जिनके लिए बच्चों को पढ़ाना ही सबकुछ होता है और इस कार्य के प्रति इतना समर्पित होते हैं कि हर कोई उन्हें सम्मान की नजर से देखता है और उनका आदर करता है। केरल की उषा की कहानी भी हर किसी को प्रेरित करती है।

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