अपनी शादी शुदा जिंदगी को बनाये खुश मई इस तरह …..

किसी मनुष्य का शिशु रूप में जन्म होता है तो वह उसके जीवन के आरंम्भ का जन्म होता है और जैसे-जैसे वो अपने जीवन के विभिन्न पड़ावों को पार करता जाता है उसके नए-नए रूप में कई जन्म होते है. उन्ही में से एक होता है, दाम्पत्य जन्म.  

 

दाम्पत्य जीवन का जन्म केवल शादी होने से नहीं होता है. स्त्री और पुरुष के पवित्र बंधन में बांधने को शादी कहा जाता है और इस संस्कार के बाद इस जोड़े को दम्पति कहा जाता है.

 

दम्पति अर्थात अपनी सोच विचार को एकात्मक कर, एक साथ जीवन के हर पहलु को जीना व हर परिस्थिति में अपने विचारों और ताप को खुद पर हावी ना होने देना.

एक सुखी दम्पति को चाहिए कि वो अपने मन में उठे क्रोध के तूफ़ान को चिल्लाकर व्यक्त करने की बजाय खुद को शांत कर  अपने ताप से वातावरण को प्रभावित होने से बचाएं. अपने रिश्ते को मजबूती देने के लिए हमेशा ही अपने अहंकार को बीच में आने से रोकना बहुत जरूरी है.

 

एक सुखी दम्पति वही होता है जो अपने साथी के भावों को बिना कहे ही सुन ले और उस पर यथोचित प्रतिक्रिया देकर उसके दुःख को कम करें फिर चाहे खुद के अंदर कितनी भी वेदना क्यों ना भरी पड़ी हो.

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